देवबंद। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस ने उप जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को 11 सूत्रीय मांग पत्र भेजा है। यूनियन पदाधिकारियों ने बताया कि सरकार द्वारा लागू किए गए चारों श्रम कानून मजदूर विरोधी हैं।
इन कानूनों के जारी नोटिफिकेशन को वापस लिया जाए। इंडियन लेबर कांफ्रेंस वर्ष 2025 के बाद नहीं बुलाई गई। जल्द कांफ्रेंस बुलाकर पूर्व के सम्मेलनों द्वारा की गई सिफारिशों को लागू किया जाए। उत्तर प्रदेश कारखाना अधिनियम में किए गए संशोधन वापस लेने, 200 अरब डालर वाले पूंजीपतियों पर चार प्रतिशत संपत्ति कर लगाने व असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की।
इसके अलावा उन्होंने किसानों को फसलों की एमएसपी खरीद की गारंटी देने, बिजली सहित सभी सार्वजनिक क्षेत्रों के निजीकरण पर रोक लगाने, राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन योजना रद्द करने, आशा, रसोईया व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा देकर 26 हजार रुपये वेतन देने की मांग की।
साथ ही मनरेगा में 200 दिन प्रतिवर्ष काम की गारंटी व बढ़ती महंगाई पर अंकुश लगाने की मांग भी की है। ज्ञापन देने वालों में आईटीयू के जिलामंत्री सुरेंद्र कुमार, खेत मजदूर यूनियन के जिलाध्यक्ष कैलाशचंद, सोनू कुमार व प्रवेश गौतम आदि रहे।