नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर प्रस्तावित उड़ान की तारीख से तीन महीने पहले ही राज्य सरकार की ओर से किए जाने वाले यात्री सुविधाओं के काम पूरे कर लिए गए हैं। यमुना तट पर बने रेनीवेल से पानी आपूर्ति शुरू कर दी गई है। इसके अलावा बिजली आपूर्ति सुचारू होने के साथ ही इंटरचेंज के जरिये सड़क मार्ग से एयरपोर्ट तक पहुंचने का मार्ग सुगम बना दिया गया है। यमुना प्राधिकरण ने स्टेट सपोर्ट एग्रीमेंट के तहत पूरे हुए इन कार्याें की रिपोर्ट तैयार कर ली है। अहम यह है कि एयरपोर्ट के चारों चरण के लिए आवश्यक यात्री सुविधाओं को पूरा करने के हिसाब से निर्माण कार्य कराए गए हैं।
एयरपोर्ट के निर्माण के दौरान स्टेट सपोर्ट एग्रीमेंट के तहत यमुना प्राधिकरण को सड़क, पानी और बिजली की सुविधा देने की जिम्मेदारी दी गई थ्। इसके तहत विमान सेवा शुरू होने से पहले यहां बिजली, पानी और सड़क कनेक्टिविटी का कार्य पूरा कर दिया गया है। एयरपोर्ट के पहले चरण में सालाना 1.20 करोड़ यात्रियों के सफर करने की पहुंचने के आसार हैं। वहीं चौथे चरण तक यात्रियों की संख्या बढ़कर सात करोड़ सालाना पहुंचने की संभावना जताई गई है।
जरूरत से एक एमएलडी ज्यादा पानी की आपूर्ति
एयरपोर्ट परिसर में चार एमएलडी पानी की आपूर्ति शुरू करा दी गई है। फिलहाल, एयरपोर्ट पर तीन एमएलडी पानी की आवश्यकता है। पानी की आपूर्ति पूरी करने के लिए फलैदा बांगर में हाइड्रो एब्स्ट्रेशन पंप लगाकर 6.7 किमी लंबी पाइनलाइन बिछाई गई है। पानी की आपूर्ति शुरू कराकर टेस्टिंग का काम पूरा कर लिया गया है। यहां से आने वाले पानी को वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) से शोधित कर आपूर्ति की जाएगी। जामिया मिल्लिया इस्लामिया से तैयार डिजाइन के आधार पर पाइपलाइन बिछाने में 6.45 करोड़ और हाइड्रो एब्स्ट्रेक्शन पंप स्थापित करने में 6.24 करोड़ रुपये की लागत आई है। यमुना तट पर चार एमएलडी पानी और एयरपोर्ट तक पहुंचाने के लिए काम शुरू कर दिया गया है।
एनसीआर के साथ पश्चिमी यूपी और आगरा तक कनेक्टविटी
एनसीआर के शहरों के अलावा आगरा और पश्चिमी यूपी के जिलों के लोगों की एयरपोर्ट तक पहुंच आसान करने के लिए यमुना एक्सप्रेस वे इंटरचेंज का काम पूरा कर लिया गया है। आठ लेन के सात सौ मीटर लंबे इंटरचेंज के बनने से नोएडा, दिल्ली, गाजियाबाद, गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा समेत पूरे एनसीआर और आगरा, मथुरा तक के लोगों के लिए नोएडा एयरपोर्ट की सीधी कनेक्टिविटी हो गई है। इसके अलावा इस ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए एनएचएआई, भारतमाला परियोजना के तहत 2414 करोड़ की लागत से 31 किमी लंबा छह लेन के ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण कर रहा है। हरियाणा की सीमा में 22 किमी और जेवर की सीमा में 9 किमी लंबे इस एक्सप्रेसवे का नौ किमी का हिस्सा जेवर में छह गांव की जमीन पर बन रहा है। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के रास्ते ही एयरपोर्ट को यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए दयानतपुर गांव के पास इंटरचेंज का निर्माण हुआ है।
जरूरत से तीन गुना ज्यादा बिजली आपूर्ति के संसाधन
एयरपोर्ट की जरूरत के तीन गुना ज्यादा बिजली आपूर्ति के संसाधन का इंतजाम किए गए हैं। एयरपोर्ट को 204 एमवीए बिजली की आवश्यकता होगी, जबकि प्राधिकरण की ओर से 623 मेगावाट बिजली आपूर्ति की व्यवस्था की गई है। इसके लिए सेक्टर-32 में 400 केवीए का सब स्टेशन व सेक्टर-18 में 220 केवीए का सब स्टेशन बनाया गया है। एयरपोर्ट तक बिजली की लाइन भी पहुंचा दी गई है, अंदर की व्यवस्था टाटा पावर प्रोजेक्ट करेगी। सेक्टर-32 के सब स्टेशन की क्षमता 503 और सेक्टर-18 के उपकेंद्र की क्षमता 120 एमवीए है। ऐसे में जरूरत के तीन गुना बिजली मुहैया है।
ऐसे बढ़ेगीं एयरपोर्ट की जरूरतें
फेज यात्री बिजली पानी
पहला- 1.2 करोड़ 19 एमवीए 3 एमएलडी
दूसरा- 3 करोड़ 28 एमवीए 6 एमएलडी
तीसरा- 5 करोड़ 50 एमवीए 9 एमएलडी
चौथा- 7 करोड़ 107 एमवीए 12 एमएलडी
नोट: नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड से प्राप्त अनुमानित रिपोर्ट से प्राप्त आंकड़े।