ग्रामीण अंचल में स्वरोजगार का नया अध्याय लिख रहीं महिलाएं अब तुलसी की माला बनाकर अपनी किस्मत बदलने की कोशिश कर रही हैं। सादाबाद ब्लॉक के गांव मड़नई में मां खैरे वाली स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं करीब 12 महिलाएं न सिर्फ तुलसी की खेती कर रही हैं, बल्कि उसकी लकड़ी से माला बनाकर उसे वृंदावन, मथुरा और आगरा तक आपूर्ति भी कर रही हैं।
समूह की महिलाओं ने बताया कि तुलसी की खेती के लिए ग्राम पंचायत की भूमि पर छोटे-छोटे प्लॉट तैयार किए गए हैं, जिनकी नियमित देखभाल की जाती है। तुलसी के पौधे तैयार होने के बाद उनकी लकड़ी काटी जाती है और फिर हाथ से उसे छीलकर, चमकाकर व पिरोकर सुंदर माला बनाई जाती है।
एक महिला औसतन दिनभर में 150 से 200 मालाएं तैयार कर लेती है। वृंदावन और मथुरा के धार्मिक प्रतिष्ठानों में इन मालाओं की काफी मांग रहती है। समूह की महिलाओं के अनुसार साल भर में इनकी बिक्री से करीब 14 लाख रुपये की आमदनी हो जाती है। इससे न केवल महिलाओं को रोजगार मिला है, बल्कि उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है।
उपायुक्त स्वत: रोजगार प्रेमनाथ यादव ने बताया कि अब इन महिलाओं की योजना है कि वे तुलसी से अगरबत्ती और औषधीय उत्पाद भी तैयार करें, ताकि कमाई के और साधन बढ़ सकें। गांव मड़नई की ये महिलाएं अब अन्य गांवों की महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई हैं।
पहले हम घर तक सीमित थीं, लेकिन अब तुलसी की माला बनाकर हम लोग आर्थिक रूप से सक्षम हो चुकी हैं। सरकार के ग्रामीण आजीविका मिशन योजना के तहत मिले प्रशिक्षण से हमें यह काम शुरू करने का हौसला मिला।
-सीमा देवी, समूह की सदस्य
हमारी कोशिश है कि अपने समूह को बढ़ाया जाए, ताकि आमदनी अधिक हो। हमने पिछले दो सालों में काम को काफी आगे बढ़ाया है। शुरुआत में हमारा समूह दो से तीन लाख रुपये ही कमा पाता था, लेकिन अब यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
-ममता देवी, समूह की सदस्य