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दो घंटे तक दर्द से कराहती रही महिला, नहीं पहुंची एंबुलेंस

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जिला अस्पताल में एंबुलेंस के इंतजार में तड़पती महिला, साथ में खड़े परिजन।
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नोएडा। जिले में एक बार फिर सरकारी एंबुलेंस सेवा की पोल खुल गई। सेक्टर-30 स्थित जिला अस्पताल में करीब दो घंटे तक एक महिला दर्द से कराहती रही, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। इससे महिला की तबीयत अधिक खराब हो गई। इस पर परिजनों ने अस्पताल में हंगामा करना शुरू कर दिया। मामले की जानकारी होने पर वहां मौजूद मीडिया कर्मियों के कॉल कर एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम से लैस एंबुलेंस से पीड़िता को दिल्ली हायर सेंटर भिजवाया।
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ग्रेनो वेस्ट के चार मूर्ति निवासी पार्वती को पीठ में तेज दर्द की शिकायत पर परिजन मंगलवार सुबह निजी वाहन से जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजनों ने बताया कि पहले सीएचसी बिसरख लेकर पहुंचे थे, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर बेटी नेहा मां को लेकर सुबह करीब 11 बजे जिला अस्पताल पहुंच गई। इमरजेंसी वार्ड में तैनात चिकित्सक ने प्राथमिक उपचार के तौर पर दो इंजेक्शन लगा दिए। इसके बाद भी कोई आराम नहीं मिला तो दिल्ली सफ दरजंग अस्पताल रेफ र कर दिया। महिला दो घंटे तक इमरजेंसी वार्ड के बाहर स्ट्रेचर पर दर्द से कराहती रही, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। परिजनों ने बताया कि कई बार 108 पर कॉल की गई। इलाज में देरी से तबीयत बिगड़ने लगी और उल्टियां शुरू हो गईं। इससे गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया। मीडिया कर्मियों के हस्तक्षेप पर अफ सरों ने एंबुलेंस बुलाई और पीड़िता को दिल्ली भेज दिया। इस बाबत सीएमएस डॉ. रेनू अग्रवाल का कहना है कि एंबुलेंस में देरी होने पर हंगामे की सूचना नहीं है। यदि ऐसा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, एंबुलेंस सेवा से जुड़े पदाधिकारियों ने मामले में लापरवाही का ठीकरा जिला अस्पताल के डॉक्टर व स्टाफ पर फोड़ा है। पदाधिकारियों का कहना है कि स्टाफ की जिम्मेदारी है कि 108 पर कॉल कर एंबुलेंस बुलाए। इसके बाद 5 से 10 मिनट में एंबुलेंस अस्पताल पहुंच जाती है, लेकिन स्टाफ ने ऐसा नहीं किया। इसी कारण मरीज को परेशानी हुई।
सभी आरोप निराधार हैं
108 एंबुलेंस सेवा के प्रोग्राम मैनेजर संदीप कुमार का कहना है कि सभी आरोप निराधार हैं। नोएडा स्थित कंपनी में गैस सिलिंडर फटने से झुलसे मरीजों को दिल्ली रेफ र किया गया था। तीन एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम से लैस एंबुलेंस दिल्ली जा चुकी थीं। उस वक्त एक भी एंबुलेंस खाली नहीं थी। चिकित्सक, स्टाफ की जिम्मेदारी है कि एंबुलेंस के लिए 108 नंबर पर कॉल कर सूचना दें, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। मैंने स्वत: संज्ञान लेकर एंबुलेंस भिजवाई।
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