इसके बाद एआई की वॉयस क्लोनिंग टूल की मदद से उसकी आवाज क्लोन करते हैं। फिर उनके परिचित को उसकी आवाज में फोन कर बताया जाता है कि उनका एक्सिडेंट हो गया है या कोई भी इमरजेंसी स्थिति बताकर ठगी की जा रही है। यूपी साइबर क्राइम के एसपी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि एआई की मदद से साइबर ठगी में एनसीआर के कई मामलों की जांच हो रही है। हाल के महीने में दर्जनों ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें एआई के इस्तेमाल होने की आशंका है। साइबर क्राइम की टीम सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।
तीन से पांच सेकेंड की आवाज से वॉयस क्लोनिंग आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के माध्यम से किसी की भी आवाज की नकल करने के लिए सिर्फ तीन से पांच सेकेंड का वीडियो चाहिए। साइबर क्रिमिनल फेसबुक, इंस्टाग्राम या यूट्यूब पर सर्च कर किसी भी आवाज का सैंपल ले लेते हैं। इसके बाद वायस क्लोन कर उनके परिचित, रिश्तेदारों को फोन किया जाता है। आवाज की क्लोनिंग ऐसी होती है कि पति-पत्नी, पिता पुत्र तक आवाज नहीं पहचान पा रहे हैं।
सगे संबंधी का फोन आए तो पहले कर लें पता
हाल के दिनों में इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। दोस्त रिश्तेदार बनकर मदद व इमरजेंसी के नाम पर लाखों की जालसाजी कर रहे हैं। अगर आपके पास दोस्त, रिश्तेदार की आवाज में किसी नंबर से फोन आए तो आप सतर्क हो जाएं। तुरंत ही उनके पास फोन कर पहले जानकारी लें तब पैसे दें। केवल आवाज पहचान कर पैसे दिए तो फंस जाएंगे।
ठगी से बचाव के लिए करें यह उपाय
- अलग-अलग अकाउंट का अलग-अलग पासवर्ड रखें, एक-जैसे पासवर्ड बनाने से बचें।
- यदि दोस्त या सगे-संबंधी की आवाज में पैसे के लिए फोन आए तो एक बार खुद फोन करके कंफर्म कर लें ।
- साइबर फ्रॉड के शिकार होने पर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।