मानसून में बच्चों की आंखों को लाल कर रहा वायरल कंजेक्टिवाइटिस
- स्विमिंग पूल और संक्रमित बच्चों से बनाएं दूरी, चाइल्ड पीजीआई में 15 फीसदी केस वायरल पहुंच रहे
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। मानसून की बारिश के साथ ही छोटे बच्चों को आंखों में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। चाइल्ड पीजीआई की ओपीडी में वायरल कंजेक्टिवाइटिस बीमारी के रोजाना 15 फीसदी मरीज पहुंच रहे हैं। आंखों में संक्रमण को ठीक होने में करीब आठ दिन का समय लग रहा है।
चाइल्ड पीजीआई में पीडियाट्रिक ऑफ्थेल्मोलाॅजी विभाग में रोजाना 60-70 बच्चे अपनी आंखों की जांच कराने आते हैं। इनमें इन दिनों वायरल कंजेक्टिवाइटिस के मरीज अधिक हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. विक्रांत शर्मा ने बताया कि वायरल कंजेक्टिवाइटिस में भी एलर्जिक कंजेक्टिवाइटिस की तरह ही आंखें लाल होने, हल्की सूजन के लक्षण मिलते हैं। लेकिन, यह उससे अलग है। वायरल कंजेक्टिवाइटिस में आंख से पानी आना शुरू हो जाता है। इसके अलावा कान के पास लिंफ नोड, एक तरह की गांठ बनने लगती है। इसमें दर्द भी हो सकता है। वायरल कंजेक्टिवाइटिस के एक से दूसरे में फैलने का खतरा भी बन जाता है। ऐसे में यह सुझाव दिया जाता है कि जिस बच्चे को यह संक्रमण हो, उसका रूमाल, तौलिया कोई दूसरा उपयोग न करे। इससे परिवार या साथ के दूसरे बच्चों को इससे बचाया जा सकता है।
डॉ. शर्मा का कहना है कि वायरल कंजेक्टिवाइटिस होने पर लोग मेडिकल स्टोर से डेक्सामेथेसॉन आई ड्रॉप लेकर डालना शुरू कर देते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए। वायरल कंजेक्टिवाइटिस के मामले में बच्चे को अलग तरह से इलाज की जरूरत होती है। उसे किसी नेत्र रोग विशेषज्ञ को ही पहले दिखाएं।
इनसेट
संक्रमण हो तो क्या न करें
- रूमाल, तौलिया, चादर जैसे कपड़े अलग रखें
- मेडिकल स्टोर से ड्रॉप लेकर डालना शुरू न करें
- बारिश के समय में स्विमिंग पूल का उपयोग न करें
- बच्चा अगर कांटेक्ट लेंस का उपयोग करता है तो बंद करा दें