संवाद न्यूज एजेंसी
रादौर। घिलौर गांव में बनने वाली बायोगैस फैक्टरी का निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही विरोध होना शुरू हो गया। मंगलवार को गांव के सरपंच सतीश कुमार व पंचों के नेतृत्व में बैठक हुई। इसमें ग्रामीणों ने गांव में फैक्टरी बनने के रोष में नारेबाजी की। बैठक करने के बाद ग्रामीणों ने फैक्टरी का निर्माण कार्य रुकवा दिया है।
फैक्टरी के एचआर संदीप चौधरी ने आश्वासन दिया कि गांव में प्राकृतिक तौर पर पराली से बायोगैस तैयार होगी। इस पर ग्रामीण संतुष्ट नहीं हुए और फैक्टरी न लगने की मांग पर अड़े रहे। गांव के सरपंच सतीश का कहना है कि ग्रामीण अधिकारियों से मिले आश्वासनों से संतुष्ट नहीं है। गांव के लोग जल्द आपसी सहमति से निर्णय लेंगे।
सरपंच सतीश कुमार, उपकार दत्ता, जवाहर दत्ता, दीपक, प्रेमपाल, धवि दता, पूर्व सरपंच भूपेंद्र सिंह, जयपाल मगरा पंच, सुरेंद्र, पवन मगरा, बलदेव सैनी, मुकुल सैनी, बुलीराम ने बताया कि गांव में एक कंपनी द्वारा बायोगैस प्लांट लगाया जा रहा है। गांव के पास बायोगैस प्लांट से ग्रामीणों को गांव में प्रदूषण होने से बीमारियां फैलने का खतरा सता रहा है, वहीं बायोगैस प्लांट से गांव में लोगों को सांस लेना तक मुश्किल हो सकता है।
इससे गांव में किसानों को खेती करने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ सकता है। इसलिए गांव के लोगों ने यहां फैक्टरी लगाने पर विरोध करने का निर्णय लिया है। फैक्टरी के एचआर संदीप चौधरी का कहना है कि केंद्र सरकार ने 2020 में बायोगैस प्लांट नीति बनाई थी।
इसके तहत बायो गैस प्लांट का निर्माण कराया जा रहा है। पराली से प्लांट में बायो गैस तैयार की जाएगी, जिससे सीएनजी गैस बनेगी। इससे वाहन चलाए जा सकते हैं। बायोगैस प्लांट से कोई प्रदूषण नहीं होता। प्लांट में किसानों से पराली खरीद कर प्राकृतिक तौर पर बायोगैस तैयार की जाएगी। इससे मानव जीवन को कोई खतरा नहीं है। मामले को लेकर ग्रामीणों से बात की जा रही है। जल्द ही मामले का समाधान कर लिया जाएगा।