रविवार को दिए गए बयान में टिकैत ने कहा कि महाराष्ट्र की तर्ज पर पहचान का फार्मूला तय होना चाहिए। हरा और लाल रंग भी पहचान का आधार हो सकता है। ढाबा संचालक अपने रोजगार और आस्था के लिए अगर कोई नाम रखना चाहता है तो इसमें दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बड़े अक्षरों में वेज और नॉनवेज लिखा जाना जरूरी है। इसके लिए वह प्रशासन से बात करेंगे। कांवड़ यात्रा भाईचारे का संदेश देती है। जिले से होकर देशभर के कांवड़िये जाते हैं। ऐसे हालात में सभी लोगों को अपने-अपने स्तर से सहयोग करना चाहिए। बेहतर माहौल रहना जरूरी है। इस प्रकरण में मेरठ और सहारनपुर रेंज के अधिकारियों से बात कर अपने सुझाव दिए जाएंगे।