फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Uttarkashi Cloud Burst: 'हार्ट अटैक न आया होता तो...', तीन जगह बादल फटने के बाद सता रही अपनों की चिंता

Thu, 07 Aug 2025 04:52 PM IST
शाहरुख खान वान्या दीक्षित, अमर उजाला, नोएडा

सार

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में आपदा के बाद पहाड़ के लोगों पर चिंता के बादल छाए हैं। दिल्ली-एनसीआर के लोग धराली में रहने वाले अपनों से संपर्क करने को परेशान दिखे। 
विज्ञापन
उमंग आहूजा और मनोज आहूजा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में धराली समेत तीन जगहों पर बादल फटने से आई तबाही के बाद नोएडा में रह रहे पहाड़ के लोगों पर चिंता के बादल छाए हैं। कोई रिश्तदारों की हाल-खबर लेने में जुटा है तो कोई परिवार के लोगों और जान-पहचान वालों को फोन कर रहा है। जिनकी बात हो गई वे तो आश्वस्त हैं लेकिन जिनकी नहीं हुई है, उन्हें अपनों की चिंता सता रही है।
विज्ञापन


जिस होटल में ठहरते वह आपदा में बह गया
सेक्टर 120 स्थित लॉरेल प्रतीक सोसाइटी निवासी उमंग आहूजा ने बताया कि 19 जुलाई को जब मेरे भाई को हार्ट अटैक आया तो हम सब बहुत दुखी थे और यह सोच रहे थे कि ऐसा क्यों हुआ, अगर भाई को हार्ट अटैक न आया होता तो वह भी उत्तरकाशी की धराली कस्बे में आई आपदा का शिकार हो सकते थे, क्योंकि वह 4 अगस्त को हर्षिल वैली जाने वाले थे। वह होटल भी बह गया जहां पर रुकते थे। ऐसे में हम सबको रोने के सिवाये और कुछ नहीं मिलता। 

उमंग ने बताया कि उनके भाई उधम सिंह नगर के काशीपुर में रहते हैं और हर्षिल वैली में सेब और राजमा का व्यापार करते हैं। बताया कि भाई को 19 जुलाई को हार्ट अटैक आया था। डॉक्टर को दिखाया तो डॉक्टर ने हार्ट में स्टंट डालने की सलाह दी। उमंग के भाई मनोज आहूजा (60) ने बताया कि वह अपने व्यापार के लिए काशीपुर से हर्षिल वैली जाते थे जहां उनका जाना आना साल में दो-तीन बार होता है। वह जब भी जाते तो एक या दो महीने रुका करते थे। 
विज्ञापन

पहले 20 जुलाई को जाने का प्लान था लेकिन 19 जुलाई को हार्ट अटैक के बाद सर्जरी हुई और स्टंट डाले गए। इसके बाद तबीयत में सुधार हो रहा था और 4 अगस्त का जाने का प्लान बना था। हालांकि जांच की रिपोर्ट देर में आने की वजह से वह नहीं जा सके थे और पांच को वहां पर आपदा आ गई।

वह होटल भी बह गया जहां रुकते थे
मनोज ने बताया कि वह हर्षिल वैली में रुकते हैं और पहले धराली में भी रुका करते थे जहां पर आपदा आई है। वह उसी होटल में रुकते थे जो आपदा में बह गया है।

धराली के लोगों से नहीं हो पा रहा संपर्क
पौड़ी गढ़वाल स्थित थलीसैंण में 22 साल बिताने वाली रजनी ढौंडियाल जोशी वसुंधरा गाजियाबाद में रहती हैं। रजनी कहती हैं कि उनके जानने वाले कई लोग उत्तरकाशी में रहते हैं और आपदा के बाद से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। वह लगातार कोशिश कर रही हैं लेकिन न तो फोन लग रहा है और न ही सोशल मीडिया पर संपर्क हो रहा है। उन सभी की चिंता हो रही है कि वह सुरक्षित हैं अथवा नहीं। मन बहुत परेशान हैं। बारिश के दौरान मलबा आने से हमारे गांव थलीसैंण का रास्ता भी बंद हो गया है।

 
विज्ञापन

वहीं हैं रिश्तेदार जहां से आई थी सीटियों की आवाज
वसुंधरा इन्क्लेव निवासी ने हरीश असवाल ने बताया कि वह उत्तरकाशी के निवासी हैं। धराली कस्बे के सामने वाले मुखबा गांव में उनके रिश्तेदार रहते हैं जहां से सीटियों की आवाज आ रही थी। फिलहाल सभी रिश्तेदार सभी सुरक्षित हैं। वह हर साल धराली जाते थे। दो महीने पहले मई में होकर वापस आए थे। सभी की सुरक्षा और जानमाल नुकसान की उनको चिंता सता रही है।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें