आम्रपाली प्रिंसले एस्टेट में रखरखाव शुल्क पर जीबीएम में हंगामा
- हंगामे के बीच एओए ने बुलाई पुलिस, निवासी हुए आक्रोशित, लोगों के विरोध के बाद बढ़ा शुल्क हुआ वापस
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। आम्रपाली प्रिंसले एस्टेट सोसाइटी में रविवार को अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) की ओर से जेनरल बॉडी मीटिंग (जीबीएम) में हंगामा हो गया। बैठक में निवासियों ने बढ़े हुए रखरखाव शुल्क का विरोध शुरू कर दिया। मौके पर वित्तीय अनियमिताओं के आरोप लगाए गए। तीखी नोकझोंक के बाद हालात बिगड़ते देख एओए ने पुलिस बुला ली। पुलिस को देख निवासी और आक्रोशित हो गए। इसके बाद एओए के पदाधिकारी बैठक छोड़ चले गए। हालांकि लगातार विरोध के बाद एओए की ओर से बढ़ाए गए रखरखाव शुल्क के फैसले को वापस ले लिया गया। अब सोसाइटी निवासियों को 2.20 रुपये प्रति वर्गफीट शुल्क चुकाना होगा।
इससे पहले सेक्टर-76 स्थित सोसाइटी की जीबीएम में निवासियों ने बढ़ाए गए मेंटेनेंस शुल्क और परियोजना के निर्माण की देखरेख के लिए बनाई गई कमेटी भंग करने की मांग की। इसके अलावा वित्तीय लेखा-जोखा प्रस्तुत करने की बात जोर शोर से उठी। निवासियों का दावा है कि इस दौरान जब एओए की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिए गए। इसके बाद हंगामा शुरू हो गया। निवासियों का कहना है कि पूर्व में 1.90 रुपये प्रति वर्गफीट शुल्क लिया जाता था। फिर इसको बढ़ाकर 2.20 रुपये प्रति वर्गफीट कर दिया। पिछले छह महीने में दो बार यह शुल्क बढ़ाकर एक मई से 2.50 रुपये प्रति वर्गफीट शुल्क कर दिया गया है।
एओए का दावा-12 साल से खाली पड़ी जगह पर बनाया पार्क, लेखा-जोखा भी किया प्रस्तुत
एओए अध्यक्ष विकास कुमार ने बताया कि रविवार को हुई जीबीएम में लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया। फॉरेंसिक ऑडिट आने बाद वह भी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी। सोसाइटी में 12 वर्षों से खाली पड़ी जगह को पार्क के रूप में विकसित किया। जिसमें नए झूले, बास्केटबॉल कोर्ट की सुविधा के साथ शनिवार को शुरू की गई है।
कमेटी नहीं कर पा रही थी काम, इसलिए किया भंग
निवासियों ने आरोप लगाया कि एनबीसीसी के काम की देखरेख के लिए बनाई गई कमेटी बिना किसी कारण भंग कर दी गई। जबकि एओए अध्यक्ष विकास कुमार ने बताया कि कमेटी सिर्फ 90 दिनों के लिए बनाई गई थी। 30 दिन का मौका और दिया था। कमेटी काम करने में विफल रही और एनबीसीसी से काम नहीं करा सकी, जिससे सोसाइटी का पैसा और समय दोनों बर्बाद हुआ। इसके बाद कमेटी को भंग कर दिया गया।
पिछले कई सालों से एओए जिम्मेदारों से काम नहीं करा सकी, निवासियों के दबाव के बाद जब कमेटी बनी, कमेटी को काम न करने के बजाय परेशान किया । – रंजन कुमार
मैं कमेटी में था, कमेटी जीवीएम में बनी थी, उसे बिना जीवीएम में निर्णय लिए सिर्फ मैसेज डालकर भंग कर दिया गया । – हुमायूं शहजाद
छह महीने में दो बार मेंटेनेंस बढ़ाया गया। इसकी शिकायत और लगातार बढ़ते विरोध को देख एओए ने निर्णय वापस लिया। - निहारिका
एओए से कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे गए। जिनका संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। वित्तीय मामलों की पूरी जानकारी नहीं दी गई। - हेमंत
एओए की ओर से जीबीेएम में पुलिस बुलाई गई, जिसके हमारी बातें जीबीएम में नहीं सुनीं गईं। यह सही नहीं है। -सुधीर कुमार
हर माह निवासियों को वित्तीय जानकारी दी जाती है, इस जीबीएम में वित्तीय लेखा जोखा रखा गया, फॉरेंसिक ऑडिट भी जल्द प्रस्तुत की जाएगी, कमेटी काम नहीं कर रही थी, जिसके चलते उसे भंग किया गया है, सोसाइटी के अधिकतर निवासी कार्यों से संतुष्ट है। - विकास कुमार, एओए अध्यक्ष
विकास कुमार
विकास कुमार
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