ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक मंत्रालय की तरफ से बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कारों की घोषणा की गई। इसमें मूलरूप से नोएडा के बरौला गांव निवासी ब्रह्मपाल नागर को रागनी की विरासत को संजोने और बढ़ाने पर शामिल किया गया है। अब प्रदेश सरकार से सम्मान दिए जाने का पत्र आएगा, जिसमें जगह और तिथि होगी तब उन्हें यह पुरस्कार दिया जाएगा।
ब्रह्मपाल ग्रेटर नोएडा स्थित मित्रा सोसाइटी में रहते हैं। कई प्रदेशों में ब्रह्मपाल नागर की लिखी रागनी को गाया व सुना जाता है। ब्रह्मपाल ने देश के अलग-अलग हिस्सों में गायकी से लोगों को लुभाया है। इतना ही उन्होंने इटली, फ्रांस, रूस, जर्मनी, आस्ट्रिया, पोलैंड, हंगरी समेत करीब 24 देशों में रागनी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया है। ब्रह्मपाल ने बताया कि मामा के घर गाजियाबाद के टीला गांव से रागनी का सफर शुरू किया था। इनके गुरु सेवाराम ने अंतरात्मा में रागनी को उतारकर एक कलाकार के रूप में स्थापित किया है। ब्रह्मपाल ने बीए की शिक्षा मेरठ विश्वविद्यालय से की है। इसके अलावा बीएड संपूर्णानंद संस्कृत विवि से की है।
दो हजार से ज्यादा रागनी को लिखा व गाया
नागर ने 40 साल के सफर में दो हजार से अधिक रागनी को लिखकर गाया है। इसमें क्षेत्रीय के अलावा समाज के मौजूदा हालात पर आधारित रागनी शामिल हैं। जिसे गांव, देश व प्रदेश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी श्रोताओं ने काफी सराहा है। नागर ने लोक कथाओं, धार्मिक व सामाजिक सरोकारों पर रागनी से छाप छोड़ी है। उन्होंने नॉलेज पार्क में भारत पटेल लोक सांस्कृतिक संस्थान की स्थापना की है। इसमें रागनी, भजन व शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दी जाती है। यहां से कई युवा तालीम लेकर संगीत के क्षेत्र में नाम कमा रहे हैं।
गुर्जरी नृत्य को बढ़ावा देने में जुटे
ब्रह्मपाल इस समय विलुप्त हो रही गुर्जरी नृत्य को बढ़ावा दे रहे हैं। नृत्य की विधाओं पर वीडियो बनाकर सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। अपने संस्थान के जरिये ऐसे कलाकारों को जोड़कर प्रस्तुतियां दे रहे हैं। इससे नए कलाकारों को भी मौका मिल रहा है।