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प्रोजेक्ट का अब का एक नहीं, होंगे तीन बैंक खाते

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नए प्रोजेक्ट के अब एक नहीं, तीन बैंक खाते होंगे
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ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने प्रोजेक्ट के एस्क्रो बैंक अकाउंट के नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब हर नए प्रोजेक्ट के तीन बैंक अकाउंट होंगे। तभी वह प्रोजेक्ट यूपी रेरा में पंजीकृत होगा। इनका नाम सेपरेट (पृथक), कलेक्शन (संकलन) और ट्रांजेक्शन (लेनदेन) अकाउंट है। इनका प्रयोग भी अलग-अलग काम के लिए किया जाएगा। यूपी रेरा को उम्मीद है कि इस नियम से प्रोजेक्ट को समय पर पूरा कराने में आसानी होगी। कुछ माह पहले यूपी रेरा ने सभी प्रोजेक्ट का अलग एस्क्रो बैंक खाते होना अनिवार्य कर दिया था, ताकि खरीदारों का पैसा उसमें जमा हो सके और वह प्रोजेक्ट में लग सके, लेकिन यूपी रेरा को शिकायत मिल रही थी कि बिल्डर एस्क्रो अकाउंट नहीं खुलवा रहे हैं। जिस पर यूपी रेरा ने अब एस्क्रो खाते के नियमों में बदलाव किया है। अफसरों ने बताया कि नए नियम नए प्रोजेक्ट पर लागू होंगे। तीन बैंक अकाउंट होने पर ही प्रोजेक्ट को यूपी रेरा में पंजीकृत किया जाएगा। अगर यूपी रेरा प्रोजेक्ट का पंजीकरण रद्द करता है तो फिर सभी बैंक अकाउंट सीज हो जाएंगे। यूपी रेरा उस धनराशि का प्रयोग प्रोजेक्ट को पूरा कराने में करेगा।
कलेक्शन अकाउंट
कलेक्शन अकाउंट में सभी खरीदारों का पैसा जमा कराया जाएगा। उसमें से 70 प्रतिशत धनराशि सेपरेट और 30 प्रतिशत धनराशि ट्रांजेक्शन अकाउंट में खुद ही ट्रांसफर हो जाएगी।
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सेपरेट अकाउंट
कलेक्शन अकाउंट से 70 प्रतिशत धनराशि सेपरेट अकाउंट में आएगी। साथ ही अगर बिल्डर किसी तरह का ऋण लेता है तो वह धनराशि भी इसी में जमा होगी। इस धनराशि का प्रयोग प्रोजेक्ट को पूरा करने और जमीन की रकम अदा करने में किया जाएगा। पैसा निकालने के लिए इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) या आर्किटेक्ट का प्रमाण पत्र लगाना होगा। जो प्रमाणित करेंगे कि कितना काम पूरा किया गया है। उसी अनुपात में रकम निकाली जाएगी। बिल्डर को हर छह माह में अकाउंट का ऑडिट कराना होगा। सीए प्रमाणित करेगा कि पैसा परियोजना पर ही खर्च किया गया है। जितनी रकम निकाली गई है, उतना ही काम पूरा हुआ है। बिल्डर ऋण समय पर नहीं चुकाता है तो उसका ब्याज इस अकाउंट से नहीं दिया जाएगा।
ट्रांजेक्शन अकाउंट
इस अकाउंट की धनराशि का पैसा उन खर्च पर किया जाएगा, जो सीधे-सीधे विकास और निर्माण से जुड़े नहीं होंगे। आवंटी को रिफंड करना, जुर्माना, ब्याज या मुआवजा देने पर धनराशि खर्च होगी। प्रोजेक्ट पूरा होने पर बिल्डर बैंक अकाउंट की ऑडिट रिपोर्ट देगा। यूपी रेरा के संतुष्ट होने पर ही इन अकाउंट को बंद कर पैसा निकाला जा सकेगा।
यूपी रेरा का यह काफी अच्छा फैसला है, लेकिन देखना होगा कि यूपी रेरा इस पर कैसे नजर रखेगा। साथ ही कैसे ऑडिट रिपोर्ट हासिल करेगा। अगर यह फैसला सफल साबित हुआ तो फिर कोई भी प्रोजेक्ट नहीं रुकेगा।
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मनीष कुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नेफोवा
हर प्रोजेक्ट का अपना एक अलग बैंक अकाउंट होना जरूरी है, लेकिन शिकायत मिल रही थी कि बिल्डर ऐसा नहीं कर रहे हैं। अब नियमों में बदलाव किया गया है। तीन बैंक अकाउंट के साथ ही नया प्रोजेक्ट पंजीकृत होगा।
भानु प्रताप सिंह, सदस्य यूपी रेरा
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