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यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो: बैटरी ने दिया धोखा तो बना डाला स्मार्ट बैग, कानपुर के पीएसआईटी के चार छात्रों का कमाल

Tue, 29 Sep 2026 11:27 AM IST
Vijay Singh Pundir अंकुर त्रिपाठी, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा

सार

कानपुर के पीएसआईटी कॉलेज के बीबीए के छात्र ध्रुव अग्रवाल ने तीन दोस्तों के साथ मिलकर 20 हजार एमएएच क्षमता की बैटरी से लैस स्मार्ट लैपटॉप बैग का प्रोटोटाइप तैयार किया है। छात्रों का दावा है कि इसकी बैटरी से एक लैपटॉप को करीब दो बार और मोबाइल को चार बार तक चार्ज किया जा सकेगा।
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छात्रों ने बना डाला स्मार्ट बैग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रोजेक्ट तैयार था और उसी दिन जमा करना था। चार दोस्त लैपटॉप पर आखिरी काम निपटा ही रहे थे कि अचानक बैटरी खत्म हो गई। आसपास चार्जिंग प्वाइंट तलाशा, लेकिन इंतजाम नहीं हुआ। समय बीत रहा था और प्रोजेक्ट जमा करने की चिंता बढ़ती जा रही थी। इसी परेशानी के बीच चारों के दिमाग में सवाल कौंधा मोबाइल को कहीं भी चार्ज करने के लिए पावर बैंक है तो लैपटॉप के लिए ऐसा इंतजाम क्यों नहीं हो सकता? इसी सवाल ने एक नए इनोवेशन की नींव रख दी। चारों ने लैपटॉप रखने वाले बैग को ही चलता-फिरता चार्जिंग स्टेशन बना दिया।

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कानपुर के पीएसआईटी कॉलेज के बीबीए के छात्र ध्रुव अग्रवाल ने तीन दोस्तों के साथ मिलकर 20 हजार एमएएच क्षमता की बैटरी से लैस स्मार्ट लैपटॉप बैग का प्रोटोटाइप तैयार किया है। छात्रों का दावा है कि इसकी बैटरी से एक लैपटॉप को करीब दो बार और मोबाइल को चार बार तक चार्ज किया जा सकेगा। खास बात यह है कि इसे बाजार में करीब 3,500 रुपये में उपलब्ध कराने की योजना है। चारों युवाओं के मुताबिक, पढ़ाई के दौरान अक्सर घंटों लैपटॉप पर काम करना पड़ता है। कॉलेज से बाहर निकलने या सफर के दौरान सबसे बड़ी चिंता लैपटॉप की बैटरी की रहती है। मोबाइल के लिए छोटा पावर बैंक जेब में रखा जा सकता है, लेकिन लैपटॉप के लिए हर जगह चार्जिंग प्वाइंट खोजना पड़ता है। इसी समस्या को उन्होंने अपने इनोवेशन का आधार बनाया।

जहां बिजली का सॉकेट नहीं, वहां बैग देगा ‘पावर’
स्मार्ट बैग को खासतौर पर विद्यार्थियों, नौकरीपेशा युवाओं और सफर के दौरान लैपटॉप पर काम करने वाले लोगों की जरूरत को ध्यान में रखकर बनाया गया है। प्रोटोटाइप में ऐसी व्यवस्था की गई है कि बैग में लैपटॉप रखने के साथ जरूरत पड़ने पर उसे चार्ज भी किया जा सके। युवाओं का लक्ष्य अलग-अलग मॉडल के लैपटॉप के अनुकूल चार्जिंग सुविधा विकसित करना है। छात्रों का मानना है कि अगर उत्पाद बाजार में सफल रहता है तो यह उन युवाओं के लिए उपयोगी साबित हो सकता है, जिन्हें पढ़ाई या काम के लिए लंबे समय तक लैपटॉप के साथ बाहर रहना पड़ता है। यानी जिस दिन एक चार्जिंग प्वाइंट की तलाश ने चार दोस्तों को परेशान किया, उसी परेशानी ने अब उनके हाथ में स्टार्टअप का नया आइडिया थमा दिया है।
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कॉलेज की परेशानी से स्टार्टअप तक पहुंचा आइडिया
जो परेशानी कुछ समय के लिए चार दोस्तों के प्रोजेक्ट पर भारी पड़ गई थी, अब वही उनके लिए स्टार्टअप का रास्ता खोल रही है। टीम का लक्ष्य प्रोटोटाइप को और हल्का व सुरक्षित बनाना है, ताकि विद्यार्थी, नौकरीपेशा लोग और लगातार सफर करने वाले लोग आसानी से इसका इस्तेमाल कर सकें। बैटरी सुरक्षा और चार्जिंग सिस्टम में सुधार के बाद इसे व्यावसायिक स्तर पर बाजार में उतारने की तैयारी है।
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