पुलिस को दी थी अपहरण की सूचना शनिवार को परिजनों ने कासना कोतवाली पुलिस ने फरहान के अपहरण की सूचना दी। बताया कि कुछ लोग फरहान को उठा कर ले गए, लेकिन पुलिस को एटीएस की कार्रवाई की जानकारी थी। पुलिस ने परिजनों को इसकी जानकारी नहीं दी। सूचना पर पुलिस जांच करने भी पहुंची। काफी देर बाद परिजनों को एटीएस की कार्रवाई का पता चला।
औद्योगिक सेक्टर साइट-5 के उद्यमियों का कहना है कि आरोपी फरहान अन्य उद्यमियों के साथ ज्यादा मेलजोल नहीं रखता था। वहां बनी एसोसिएशन में भी शामिल नहीं था। उनके यहां पर विशेष धर्म के काफी लोगों का आना-जाना रहता था। इस कारण अन्य उद्यमी भी उससे दूरी बनाकर रखते थे। उसकी गतिविधियां पसंद नहीं थी।
जांच में पता चला है कि आरोपी अपने ऑफिस के अंदर मुर्गियां पालता था। अंदर काफी अंड़े मिले। जिनसे चूजे निकलते थे और फिर उनका हलाल करता था। इसके लिए कंपनी के अंदर एक धारदार दाव मिला है। वहां मौजूद कर्मचारियों का कहना है कि दाव से मुर्गी और उसके चूजों को काटा जाता था। फिर उनके मांस को पकाकर परोसा जाता था।
जिस भूखंड पर आरोपी फरहान की कंपनी लगी है, उसके दोनों तरफ के भूखंड अभी खाली है। वहां उद्योग नहीं लगे हैं। इस कारण आसपास की कंपनियों में काम करने वाले लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है। पड़ोसी की कंपनी में काम कर रहे एक सुरक्षाकर्मी ने बताया कि एक्सपो मार्ट में प्रदर्शनी के समय यहां पर काफी लोग आते थे।
वाकफी फाउंडेशन में अहमत तोर्वा, फरहान नबी सिद्दीकी, नासी तोर्खा और महमत कुपेली निदेशक हैं। वहीं इस्तानबुल इंटरनेशनल प्रा. लि. कंपनी में फरहान और नासी तोर्चा के साथ फैजान नबी भी निदेशक हैं। इस कंपनी को दिसंबर 2014 में बनाया गया था। वहीं नासी तोर्बा और फरहान दो अन्य कंपनियों रियल ग्लोबल एक्सप्रेस लाजिस्टिक प्रा. लि. और प्रोडक्ट्स प्रा. लि. से भी जुड़े हैं। एटीएस इन कंपनियों के पूर्व निदेशकों के बारे में भी छानबीन करने के लिए उनको सरगर्मी से तलाश रही है। ताकि इस नेटवर्क के बारे में बाकी जानकारियां हासिल की जा सकें। बताया जा रहा है कि जर्मनी और तुर्किये से उनसे मिलने वाले लोग किस मकसद से आते थे। उनको मस्जिद और मदरसे बनाने के लिए किन अंतरराष्ट्रीय इस्लामिक संगठनों द्वारा फंडिंग की जा रही थी।