उन्नाव। बांगरमऊ तहसील क्षेत्र के दो गांवों के बीच लखनऊ-आगरा और गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने के बनाए जा रहे इंटरचेंज (उतार-चढ़ाव का स्थान) का निर्माण तय समय से ढाई माह बाद भी पूरा नहीं हो सका है। इस कारण वाहनों का डायवर्जन अभी भी जारी है। इससे एक ही लेन से वाहन निकाले जा रहे हैं। इससे न केवल गाड़ियों की रफ्तार पर ब्रेक लग रहा है, बल्कि हर दिन जाम के हालात भी बन जाते हैं। कार्यदायी संस्था का कहना है कि अभी लगभग एक माह और काम चलेगा। ऐसे में वाहन अभी फर्राटा नहीं भर सकेंगे।
मेरठ से प्रयागराज के बीच बन रहा गंगा एक्सप्रेसवे बांगरमऊ क्षेत्र के शादीपुर और गौरियाकला गांव के बीच से गुजर रहा है। यहीं से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे भी निकला है। शादीपुर के पास ही दोनों एक्सप्रेसवे एक-दूसरे को क्रॉस कर रहे हैं। इसके चलते यहां पर इंटरचेंज (उतार चढ़ाव का स्थान) बनाया जा रहा है। इंटरचेंज का काम करने के लिए आगरा से लखनऊ जाने वाली लेन पर 26 मार्च को वाहनों का डायवर्जन किया गया था। तब आगरा से लखनऊ जाने वाली लेन को बंद कर दिया गया था। इसका काम पूरा होने के बाद दूसरी लेन में लखनऊ से आगरा जाने वाले रूट पर आठ जून को डायवर्जन लागू किया गया था।
इसके बाद लखनऊ से आगरा जाने वाली लेन पर इंटरचेंज के लिए अंडरपास बनाने का काम शुरू किया गया था। अंडरपास पर गर्डर रखने सहित अन्य कार्य आठ अगस्त तक पूरे होने थे। हालांकि अक्तूबर समाप्त होने वाला है लेकिन अभी तक शत प्रतिशत काम पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में डायवर्जन करीब एक माह के लिए और बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। कार्यदायी संस्था के जिम्मेदार काम समय पर पूरा न कर पाने के पीछे का ठीकरा बारिश पर फोड़ रहे हैं।
प्रतिदिन 25 हजार वाहनों का होता है आवागमन
रोजाना लखनऊ से आगरा के बीच करीब 25 हजार छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन होता है। डायवर्जन के चलते एक लेन को पूरी तरह से बंद रखा गया है। इस कारण एक ही लेन से करीब ढाई माह से वाहन आ-जा रहे हैं। डायवर्जन प्वाइंट के करीब डेढ़ किमी क्षेत्र में चालकों का पैर एक्सीलेटर से हटकर ब्रेक पर पहुंच जाता है। डेढ़ किमी क्षेत्र में वाहनों की रफ्तार 100 से घटकर 40 से 50 किमी. हो जाती है।
इंसेट-1
संकेतक तो लगाए पर कर्मचारी नहीं किए तैनात
बेहटामुजावर। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के 252 से 253.600 किमी के बीच करीब डेढ़ किलोमीटर क्षेत्र में वाहनों का डायवर्जन चल रहा है। यहां पर कार्यदायी संस्था ने केवल संकेतक लगाकर ही सुरक्षा का कोरम पूरा किया गया है। किसी कर्मचारी की तैनाती नहीं की गई है। एक तरफ पूरे एक्सप्रेसवे पर जहां वाहन 80 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से फर्राटा भरते हैं। वहीं डायवर्जन प्वाइंट पर ब्रेक लगानी पड़ती है। यहां पर वाहनों को 60 से 70 किमी प्रति घंटे की स्पीड से ही निकालना पड़ता है।
इंसेट-2
टोल से क्षेत्र के लोग गंगा एक्सप्रेसवे पर जा सकेंगे
बेहटामुजावर। शादीपुर और गौरियाकला गांव के बीच बन रहे इंटरचेंज से ही दूसरे गंगा एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर वाहनों का आना जाना होगा। क्षेत्र के लोग बांगरमऊ के हरदोई उन्नाव मार्ग पर 238 किमी पर बने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे टोल से चढ़कर गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए मेरठ और प्रयागराज का रास्ता कम समय में तय कर सकेंगे।
इंसेट-3
इंटरचेंज से आसान होगा सफर, कई जनपदों में पहुंचना होगा आसान
बेहटामुजावर। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे प्रदेश के आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, कन्नौज, कानपुर नगर, उन्नाव, हरदोई और लखनऊ सहित 10 जिलों से होकर गुजरता है। यह एक्सप्रेसवे लखनऊ को आगरा के माध्यम से यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए दिल्ली से जोड़ता है। यह 302 किलोमीटर लंबा छह लेन वाला एक्सप्रेसवे है। वहीं मेरठ से प्रयागराज तक बन रहे गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज सहित 12 जिलों से गुजर रहा है। इससे इंटरचेंज के जरिए लोग कई जनपदों तक आसानी से पहुंच सकेंगे।
वर्जन....दोनों लेन में बने अंडरपास पर गर्डर रखने का काम पूरा कर लिया गया है। उसके ऊपर सर्कल रोड और एक दूसरे पर आने-जाने के लिए उतार चढ़ाव की लेन बनाई जा रही है। सर्कल रोड पर वाहन निकालकर मजबूती जांचने का काम अभी होना है। इस कारण एक माह तक डायवर्जन और लागू रहेगा। बारिश के चलते बीच में काम प्रभावित हुआ था। अब तेजी से काम पूरा कराया जा रहा है। -अरविंद कुमार, कंस्ट्रक्टर इंजीनियर गंगा एक्सप्रेसवे।
फोटो-1-लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर लगे डायवर्जन प्वाइंट से एक ही लेन में निकलते वाहन। संवाद
फोटो-1-लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर लगे डायवर्जन प्वाइंट से एक ही लेन में निकलते वाहन। संवाद