यूनिटेक के खरीदारों ने प्राधिकरण के खिलाफ खोला मोर्चा
नोएडा। सेक्टर-113 स्थित यूनिटेक का भूखंड आवंटन प्राधिकरण की ओर से रद्द करने के बाद खरीदारों ने ट्विटर पर मोर्चा खोल दिया है। खरीदार प्राधिकरण के कदम की आलोचना कर रहे हैं। वहीं, प्राधिकरण की सीईओ ने ट्विटर पर जवाब दिया है।
खरीदारों ने प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अन्यों को ट्विटर पर टैग कर कहा है कि नोएडा प्राधिकरण ने जो बयान दिया है वह पूरी तरह से गलत है। हमने 2015 के बाद कई बार नोएडा प्राधिकरण का दरवाजा खटखटाया और समस्याओं को दूर करने की अपील की, लेकिन प्राधिकरण ने उनकी एक नहीं सुनी और 1629 खरीदारों को मुश्किल में डाल दिया। प्राधिकरण ने यूनिटेक को जितने क्षेत्रफल में भूखंड का आवंटन किया, वह भी पूरा नहीं दिया। कई बार टुकड़ों में दिया गया यानी प्राधिकरण ने खुद भी भूखंड का आवंटन पूरी तरह से नहीं किया। वहीं, जब खरीदारों का पैसा उस प्रोजेक्ट में लगा हुआ है तो प्राधिकरण ने जमीन का आवंटन निरस्त कर दिया। प्राधिकरण ने अगर जमीन का आवंटन निरस्त कर दिया तो उसके पास खरीदारों के लिए क्या योजना है, क्योंकि बिल्डर जेल में है और प्रबंधन कुछ भी नहीं बोल रहा है। ऐसे में उनके पैसे का क्या होगा। प्राधिकरण ने अपना पैसा जमीन का आवंटन रद्द कर ले लिया, लेकिन खरीदारों का पैसा कौन दिलाएगा। मामले में वह कोर्ट जाएंगे और प्राधिकरण के खिलाफ केस करेंगे। उन्हें धोखे में रखा गया और अंदरखाने सब कुछ चलता रहा।
सीईओ ने ट्वीटर पर दिया जवाब, खरीदार और भड़के
खरीदारों के ट्विटर पर अभियान चलाने के बाद सीईओ रितु माहेश्वरी ने जवाब दिया उन्होंने कहा कि जांच पड़ताल के बाद कानूनी तौर पर यह काम किया गया है। बिल्डर ने प्राधिकरण का बकाया नहीं चुकाया था। वहीं अवैध तरीके से बिना नक्शा पास कराये निर्माण कराया गया इसलिए कार्रवाई की गई। अगर कोई पात्र खरीदार है तो वह प्राधिकरण से संपर्क कर सकता है और प्राधिकरण नियमों के तहत उनके हितों की रक्षा करेगा। ट्विटर पर सीईओ के इस बयान के बाद खरीदार और भड़क गए। उनका कहना है कि इतने साल से कोर्ट, एनसीडीआरसी, प्राधिकरणों के चक्कर लगाए और अब उन्हें यह सिद्ध करना होगा कि वह पात्र हैं कि नहीं। उन्होंने प्राधिकरण की जमकर आलोचना की। यूनिटेक पर कार्रवाई के बाद प्राधिकरण ने उक्त भूखंड की नीलामी कराने का निर्णय लिया है। साथ ही प्राधिकरण का यह भी कहना है कि जो भी इस जमीन को लेगा उससे खरीदारों के हित को पूरा करने को कहा जाएगा। अब यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर यह जमीन विवादित है और यहां 1629 खरीदारों ने निवेश किया है तो कोई डेवलपर इस जमीन मामले में हाथ क्यों डालेगा। अगर कोई इसे लेता भी है तो वह इसे कैसे बनाएगा। कब तक काम पूरा कर पाएगा। यह सब कुछ प्राधिकरण को पहले ही तय करना होगा, लेकिन प्राधिकरण ने इस बारे में अभी तक कुछ भी नहीं सोचा और कार्रवाई की गाज गिरा दी।