-आरोप तय करने का विरोध करते हुए आरोपी के अधिवक्ता ने दिया तर्क
-आज भी जारी रहेगी मामले में सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र उमर खालिद के वकील ने बुधवार को कड़कड़डूमा कोर्ट को बताया कि उनका मुवक्किल उस कथित बैठक में मौजूद नहीं था, जो 2020 के दिल्ली दंगों के पीछे की बड़ी साजिश का आधार थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी के समक्ष खालिद के खिलाफ आरोप तय करने का विरोध करते हुए वकील ने ये दलीलें दीं।
इस बात पर जोर दिया कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) इस दावे की पुष्टि करते हैं। इससे पहले, एक संरक्षित गवाह ने आरोप लगाया था कि खालिद और अन्य आरोपियों ने बैठक में साजिश रची थी। वकील ने दावा किया कि खालिद से कोई बरामदगी नहीं हुई है और न ही उस पर कथित बड़ी साजिश के लिए धन जुटाने या प्राप्त करने का कोई आरोप है। वहीं, पिछले महीने खालिद के वकील ने कहा था कि उनके मुवक्किल ने एक मजाक भरी एफआईआर के तहत पांच साल हिरासत में बिताए, जिसमें कानून की पवित्रता नहीं थी। मामले में बहस बृहस्पतिवार को भी जारी रहेगी। खालिद को इस मामले में 13 सितंबर, 2020 को गिरफ्तार किया गया था। कार्यकर्ता शरजील इमाम, खालिद सैफी और आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित बीस लोगों पर दंगे भड़काने की बड़ी साजिश में कथित संलिप्तता के आरोप में मामला दर्ज है।