संभल। आदमपुर मार्ग पर गांव बेनीपुर चक में स्थित तीर्थ श्री वंशगोपाल रविवार को सुबह से ही श्री कल्कि के जयकारों से गूंजने लगा। पड़ाव स्थल चंद्रेश्वर तीर्थ चंदायन से भक्ति में रमे श्रद्धालु जब तीर्थ श्री वंशगोपाल पर पहुंचे तो गजब का उत्साह नजर आया। क्योंकि इस वर्ष भी उन्होंने 68 तीर्थ और 19 कूपों की परिक्रमा पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ पूर्ण कर ली थी।
पुरुषों, महिलाओं ने बच्चों के साथ तीर्थ के मंदिर में पूजा अर्चना शुरू की तो प्राचीन कदंब वृक्ष की परिक्रमा लगाकर मनौती मांगी। श्रद्धालु बच्चों को गोद में लेकर और अंगुली पकड़कर परिक्रमा लगाते नजर आए। युवाओं और बुजुर्गों ने भी उत्साहपूर्वक परिक्रमा पूर्ण करते हुए पूजा अर्चना की। माहौल ऐसा रहा कि कुछ समय के बाद घंटों की आवाज के बीच श्री कल्कि के जयकारे गूंजते रहे। वहीं तीर्थ पर श्रद्धालुओं ने पवित्र कुंड में स्नान भी किया। इनमें युवाओं की संख्या ज्यादा रही। नजारा ऐसा था कि युवा श्री कल्कि के जयकारे लगाते हुए पवित्र कुंड में छलांग लगा रहे थे। रविवार को सुबह से लेकर दोपहर तक पवित्र कुंड में स्नान का सिलसिला चलता रहा। संवाद
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भंडारे में प्रसाद ग्रहण करने को दिखा उत्साह
तीर्थ श्री वंशगोपाल पर रविवार को सुबह से ही परिक्रमा पूर्ण होने के मौके पर भंडारे का आयोजन हुआ। प्रसाद ग्रहण करने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह नजर आया। श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लग गई। इंतजार भी करना पड़ा लेकिन श्रद्धालुओं ने प्रसाद लिया। वहीं मंदिर पर पूजा अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं को हलुआ का प्रसाद दिया जा रहा था।
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फेरी मेले में हुई खरीदारी, झूला झूलकर लिया आनंद
तीर्थ श्री वंशगोपाल पर फेरी मेले का आयोजन भी हुआ। इसमें श्रद्धालुओं ने खरीदारी की। महिलाओं ने घरेलू सामान के साथ-साथ सौंदर्य प्रसाधन के सामान खरीदे तो बच्चों के लिए खेल खिलौने खरीदे गए। श्रद्धालुओं ने मेला परिसर में लगे झूले झूलकर आनंद लिया। चाट पकौड़ी का स्वाद भी चखा।
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सुरक्षा के रहे कड़े प्रबंध
तीर्थ श्री वंशगोपाल पर फेरी मेले और श्रद्धालुओं के उमड़ने को लेकर कड़े सुरक्षा प्रबंध रहे। थाना पुलिस के साथ ही पीएसी के जवान मुस्तैद रहे। महिला पुलिस कर्मियों ने भी ड्यूटी की। पुलिस कर्मियों की मौजूदगी को लेकर श्रद्धालुओं को भी सुरक्षा का अहसास होता रहा।
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बुजुर्गों का कहना-
.बड़े बुजुर्गों के साथ तीर्थों की परिक्रमा लगाने के लिए आते थे। बीच में परिक्रमा बंद रही लेकिन कुछ लोग परिक्रमा लगाते रहे। परिक्रमा को लेकर मन में पूरी श्रद्धा है।
-भगवानदास
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.तीर्थों की परिक्रमा बंद होने के बाद भी हमारी आस्था कम नहीं हुई। चार छह लोग पैदल ही निकलकर परिक्रमा करते थे। लोगों को परिक्रमा का पता भी नहीं चलता था।
-रामरूप सिंह
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.तीर्थ श्री वंशगोपाल को लेकर यह मान्यता है कि यहां मनोकामना पूरी होती है। श्रद्धालु कदंब वृक्ष की परिक्रमा लगाकर पूजा अर्चना करते हैं। जिससे वंश चलता है।
-रामौतार
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.हम चार साल से फेरी मेले में आ रहे हैं। तीर्थ श्री वंशगोपाल पर कदंब वृक्ष को लेकर विशेष श्रद्धा और आस्था है क्योंकि यहां भगवान श्रीकृष्ण रुक्मिणी के साथ ठहरे थे।
-दुष्यंत कुमार सिंह
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