नोएडा शहर में ‘खाकी’ एक बार फिर बदनाम हुई है। साइबर थाने में तैनात एक दरोगा और उसके पांच सिपाहियों ने फाइनेंस कंपनी की जांच के नाम पर तीन लोगों को हिरासत में लिया। जांच को रफा-दफा करने के नाम पर 7 लाख रुपये की मांग की गई।
चार घंटों तक फाइनेंस कंपनी के तीनों युवकों वसीम, परवेज और सुहेल को पुलिसकर्मी अपनी कार में घुमाते रहे। इस दौरान सौदेबाजी लगातार चलती रही। पुलिसकर्मियों ने फोन पर कंपनी संचालक माजू चौहान से 7 लाख रुपये की मांग की, मगर सौदा 5 लाख पर तय हो गया। दो लाख रुपये लेकर पुलिस ने तीनों आरोपियों को छोड़ दिया।
बाकी रकम को लेने के लिए पुलिसकर्मी लगातार कंपनी संचालक को फोन कर रहे थे। मगर उसने एसीपी रजनीश कुमार वर्मा से शिकायत कर दी। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए साइबर सेल में तैनात एक पुलिसकर्मी नितिन चौधरी और होटल संचालक सोनू को धर दबोचा, जबकि दरोगा चेतन प्रकाश, सिपाही सुमित मडार, सुमित पावला, सुमित शर्मा और अतुल नागर फरार हैं।
सेंट्रल जोन के डीसीपी हरीश चंदर ने सोमवार शाम फेज-3 थाने में प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि माजू चौहान की सेक्टर-65 स्थित बंधन फाइनेंशियल कंपनी है। सोनभद्र निवासी नीरज कुमार ने कंपनी पर 60 हजार रुपये की धोखाधड़ी करने व फर्जी होने की शिकायत साइबर सेल थाना सेक्टर-37 में की थी।
10 फरवरी को साइबर सेल में तैनात सब इंस्पेक्टर चेतन प्रकाश, सिपाही सुमित मडार, सुमित पावला, सुमित शर्मा, अतुल नागर व नितिन चौधरी आदि फाइनेंशियल कंपनी में जांच को पहुंचे। वहां कंपनी में काम करने वाले तीन युवक वसीम, परवेज और सुहेल को धर दबोचा।