- गेझा स्थित दुकान में पिंजरे में कैद कर बेच रहे थे प्रतिबंधित पक्षी
- वन विभाग की तरफ से कोतवाली फेज टू में दर्ज कराई गई एफआईआर
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। पिंजरे में कैद कर प्रतिबंधित ट्राई कलर मुनिया पक्षी बेचने वाले दुकान मालिक समेत दो को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। ये गेझा स्थित एक दुकान में दिल्ली और पश्चिम बंगाल से लाकर ट्राई कलर पक्षी बेच रहे थे। वन विभाग की तरफ से इस मामले में कोतवाली फेज टू में मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके पास से पिंजरे में कैद 10 ट्राई कलर मुनिया पक्षी बरामद की गई हैं। पुलिस व वन विभाग की टीम मामले की जांच कर रही है।
दादरी रेंज के वन विभाग में तैनात सब इंस्पेक्टर शनि गौतम ने पुलिस से शिकायत की है कि उन्हें 23 अक्टूबर को सूचना मिली कि सेक्टर-93 में ओशियन एक्वेरियम एण्ड बड्र्स नाम की दुकान में ट्राई कलर मुनिया पक्षी बेची जा रही है। इन पक्षियों को घर में कैद कर पालना और पिंजरे में रखना कानूनन अपराध है। इसके बाद वन विभाग की टीम गेझा स्थित दुकान पर पहुंची तो वहां एक पिंजरे में 10 ट्राई कलर मुनिया पक्षी कैद मिली। दुकान पर वन विभाग की टीम को मिले मोहम्मद निसार ने बताया कि वह दुकान पर नौकरी करता है। दुकान का मालिक अलीम बेग मौके पर मौजूद नहीं था। वन विभाग के अधिकारी ने उसे नोटिस भेजकर दादरी रेंज वन विभाग में बुलाया। दुकान मालिक अलीम बेग ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह प्रतिबंधित चिड़िया बेच रहा था। कोतवाली फेज टू के प्रभारी ने बताया, मामले में कोतवाली फेज टू में बल्लीमरान दिल्ली निवासी अलीम बेग और बदरपुर निवासी मोहम्मद निसार के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है। दोनों को गिरफ्तार किया गया है। दोनों को जमानत मिल गई। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस पक्षी को पिंजरे में रखना कानूनी अपराध है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में पाए जाते हैं ट्राई कलर मुनिया
ट्राई कलर मुनिया को काले सिर वाली मुनिया भी कहा जाता है। इसके तीन रंग काला, सफेद और चेस्टनट ब्राउन होते हैं। यह दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में पाए जाते हैं। इसकी आवाज़ विशिष्ट होती है। जो लंबी टर्र-टर्र के साथ समाप्त होती है। इनका मूल निवास बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका, पाकिस्तान और दक्षिणी चीन है। हालांकि ये पक्षी कैरिबियन, त्रिनिदाद, जमैका, प्यूर्टो रिको, क्यूबा और वेनेजुएला जैसे क्षेत्रों में भी मिलते हैं। ये पक्षी झुंड में रहते हैं। यह पक्षी भारत में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत सूचीबद्घ है। इसका शिकार या व्यापार अवैध है।