नगीना। उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार हाइवे पर 60 किलोमीटर की दूरी पर ट्रामा सेंटर होना चाहिए। विडंबना देखिए कि दिल्ली से गुरुग्राम, सोहना वाया नगीना, अलवर तक एक भी ट्रामा सेंटर नहीं है। इस मामले को लेकर विभिन्न स्कूलों के छात्रों ने सोमवार को बड़कली चौक पर रैली निकालकर सड़क दुर्घटनाओं में हो रही मौतों के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया। छात्रों ने एक सुर में कहा कि बेहतर यही होगा कि 30 दिसंबर तक केंद्र व प्रदेश सरकार ट्रामा सेंटर और हाइवे 248 के चौड़ीकरण पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें अन्यथा बड़ा आंदोलन करना हमारी मजबूरी होगी।
मोहम्मद शाद का कहना है कि नवंबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के लिए आदेश पारित करते हुए कहा था कि हाइवे से लगते हुए प्रत्येक जिले में ट्रामा सेंटर बनना चाहिए। इंजीनियर वसीम अकरम मेव ने बताया कि सामाजिक संगठनों के अथक प्रयासों से मेवात में ट्रामा सेंटर बनाने की घोषणा सरकार द्वारा की जा चुकी है लेकिन अमलीजामा नहीं पहनाने से क्षेत्र के लोगों में नाराजगी है। अलीजान एडवोकेट का कहना है कि पिछले 6 साल के दौरान करीब 1500 से अधिक मौतें हाइवे पर हो चुकी हैं वहीं चार हजार के करीब लोग घायल हुए। बाइक मैकेनिक तौफीक चिकारा व नसीम सांठावाडी ने कहा कि यह सरकारी मौतें हैं सरकार ही इनके लिए जिम्मेदार हैं। दूसरा मेवात जिले के बीचों-बीच से हाइवे नंबर 248 निकलता है जो सन 1980 तक देश के टॉप 10 हाइवे में गिना जाता था लेकिन उसका सरकार ने 30 साल तक हाइवे का दर्जा बंद कर दिया। यूपीए की सरकार ने 3 नवंबर 2008 दोबारा हाइवे के रूप में पुनर्गठन किया। अफजल जलालपुर, मौसम बड़कली का कहना है कि सरकार अगर नहीं जागती है तो नगीना खंड के दर्जनों स्कूलों में पढ़ने वाले 5000 से अधिक छात्रों को एकजुट करेंगे। ट्रामा सेंटर और हाइवे चौड़ीकरण की मांग को पूरा करवाने के लिए एक बड़ा आंदोलन चलाएंगे। इस अवसर पर समाजसेवी मोहम्मद जावेद नगीना, अब्बास अली, मोहम्मद अयूब, हाजी सुलेमान, आमीन खान, नंबरदार अलीम, पूर्व सरपंच शब्बीर, ब्लॉक समिति सदस्य आस मोहम्मद नांगल, अख्तर जलालपुर शामिल हुए।