ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सोनू नागर
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गौतमबुद्ध नगर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सोनू नागर ने अपने परिवार कुछ लोगों पर जानलेवा हमला, फायरिंग और झूठी कार्रवाई कराने का आरोप लगाते हुए डीसीपी से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने शनिवार को डीसीपी ग्रेटर नोएडा को एक प्रार्थना पत्र सौंपकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है।
दिए गए शिकायती पत्र के अनुसार सोनू नागर निवासी गांव मुहफाड़ थाना दनकौर, वर्तमान में गौतमबुद्ध नगर ट्रक ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि 9 जून की रात भांजा सचिन भाटी और भतीजा गौरव नगर पर कुछ लोगों ने जानलेवा हमला किया। शिकायत में दिनेश कसाना, सुभाष कसाना, सतीश कसाना सहित अन्य लोगों के नाम दर्ज कराए गए हैं।
सोनू नागर का कहना है कि हाल ही में गौतमबुद्ध नगर में ओवरलोड वाहनों के खिलाफ प्रशासन द्वारा अभियान चलाया गया था। इस अभियान के तहत कई वाहनों के चालान किए गए थे। उनका आरोप है कि इसी कार्रवाई से नाराज होकर कुछ लोगों ने उनसे रंजिश पाल ली और बाद में हमला कर दिया। 9 जून की रात करीब साढ़े नौ से दस बजे के बीच जीएल बजाज चौराहे के पास उनके भांजे सचिन भाटी और भतीजे गौरव नागर पर हमला किया गया। आरोप है कि हमलावरों ने उनकी गाड़ी को रोककर उसमें तोड़फोड़ की तथा लाठी-डंडों से मारपीट की।
शिकायतकर्ता का दावा है कि हमलावरों ने वाहन पर फायरिंग भी की। उनके अनुसार गोली वाहन के शीशे को पार करते हुए डैशबोर्ड में जाकर फंस गई, जिसका प्रमाण वाहन में अभी भी मौजूद है। सोनू नागर ने कहा है कि घटना के तुरंत बाद पुलिस सहायता के लिए 112 नंबर पर सूचना दी गई थी। उनका आरोप है कि पुलिस द्वारा निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय उनके भतीजे गौरव नागर, भांजे सचिन भाटी और अन्य परिजनों को ही थाने ले जाकर कार्रवाई की गई। उन्होंने दावा किया कि उन्हें भी हिरासत में लिया गया और बाद में जमानत करानी पड़ी।
शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि उनकी गाड़ी, जिसका नंबर यूपी-16 एफई-2082 बताया गया है, अभी भी थाने में खड़ी है। उनका दावा है कि वाहन पर गोली लगने के निशान और अन्य क्षति स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है, जिससे पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जा सकती है। मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जिन लोगों पर हमला और फायरिंग करने के आरोप लगाए गए हैं। उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने स्वयं और अपने परिवार को पीड़ित पक्ष बताते हुए न्याय दिलाने की अपील की है। डीसीपी डॉ प्रवीण कुमार सिंह ने एडीसीपी संतोष कुमार को जांच सौंपी है। एडीसीपी ने तीन दिन के भीतर जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिया है।