नई दिल्ली। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद युवाओं को सौ फीसदी रोजगार से जोड़ने के लिए पारंपरिक कोर्स को रिडिजाइनिंग किया जाएगा। इससे इंजीनियरिंग करने के बाद युवा अब बेरोजगार नहीं रहेेंगे।
दरअसल, इन कोर्स में युवाओं के लिए रोजगार के मौके बेहद कम होते हैं। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) नई शिक्षा नीति 2020 के तहत शैक्षणिक सत्र 2021-22 सें इंजीनियरिंग के कोर एरिया के कोर्स व पाठ्यक्रम में बदलाव करने जा रहा है। आगामी सत्र से देश के सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में इन नए कोर्स और पाठ्यक्रम के तहत ही पढ़ाई कराई जाएगी। कोर एरिया के ये कोर्स रोजगार और प्रौद्योगिकी पर आधारित होंगे। इसी के तहत एआईसीटीई ने सभी तकनीकी कॉलेजों से शैक्षणिक सत्र 2021 में पढ़ाई के लिए नए कोर्स और पाठ्यक्रम पर 15 नवंबर तक सुझाव मांगे हैं। नए कोर्स और नए पाठ्यक्रम के तहत पढ़ाई करवाने से पहले तकनीकी कॉलेजों को एआईसीटीई से मान्यता लेनी जरूरी है।
एसोचैम, नैसकॉम, गूगल करेगा मदद
मार्केट डिमांड के आधार पर पारंपरिक कोर्स कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रिानिक, केमिकल और सिविल इंजीनियरिंग को रिडिजाइन किया जाएगा। इसके अलावा कोर्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, इंटरनेट थिंग्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, एंबोडिड एसडब्ल्यू, डाटा एनालिस्ट्स, रोबोटिक साइंस, मार्केटिंग, मोबोलिटी कोर एरिया जोड़े जाएंगे। इसमें एप्पल, गूगल, एसोचैम, फिक्की, सीआईआई, नैसकॉम, आईआईटी के प्रतिनिधि मदद करेंगे, ताकि डिमांड के आधार पर इंजीनियरिंग की पढ़ाई हो। उल्लेखनीय है कि आईआईटी कमेटी ने सरकार को परंपरागत रोजगार मुहैया न करने वाले कोर्स को खत्म करने का सुझाव दिया था। इसी के चलते इंजीनियरिंग कॉलेजों में ऐसे कोर्स में सीटों में कटौती भी की हैं।