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मजदूर के बच्चे की मौत: तीसरी मंजिल से गिरा जिगर का टुकड़ा, प्राइवेट अस्पताल में चला इलाज; बिल पर हुआ जमकर बवाल

Sat, 07 Mar 2026 06:59 PM IST
विकास कुमार माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा

सार

बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से बच्चे के उपचार में आई लागत मांगी गई थी। इस दौरान बच्चे के परिजन ने हंगामा शुरू कर दिया।
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अस्पताल में मौजूद परिजन और मासूम गगन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ग्रेटर नोएडा के कस्बा सूरजपुर में शुक्रवार को तीन वर्षीय मासूम की तीसरी मंजिल से गिरकर मौत हो गई। मृतक की पहचान गगन (3) के रूप में हुई है। परिजन ने निजी अस्पताल में इलाज में हुई देरी पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। सूरजपुर कोतवाली पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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खेलते-खेलते गिर गया मासूम
जानकारी के अनुसार हमीरपुर निवासी अशोक अपने परिवार के साथ सूरजपुर कस्बे में किराये के मकान में रहते हैं। वह दिहाड़ी काम कर अपना परिवार चलाते हैं। शुक्रवार को वह बच्चे को साथ लेकर काम पर गए हुए थे। जिस निर्माणाधीन मकान में काम कर रहे उसकी तीसरी मंजिल से खेलत-खेलते उनका पुत्र गगन अचानक से नीचे गिर गया। बच्चे के गिरते ही वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। गंभीर रूप से घायल बच्चे को तत्काल परिजन शारदा अस्पताल में ले गए। जहां डॉक्टरों ने उसका उपचार शुरू किया। हालांकि हालत गंभीर होने के कारण इलाज के दौरान ही मासूम ने दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

अस्पताल में हुआ हंगामा
आरोप है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से बच्चे से उपचार में आई लागत मांगी गई थी। इस दौरान बच्चे की मौत से नाराज परिजन ने हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंची और घटना की जानकारी ली। परिजन को किसी तरह से शांत कराकर घर भेजा। पुलिस बच्चे का पोस्टमॉर्टम कराना चाहती थी। मगर परिजन ने पोस्टमॉर्टम कराने से मना कर दिया। इसके बाद शव को परिजन को सौंप दिया गया। पुलिस के अनुसार परिजनों ने बच्चे का अंतिम संस्कार कर दिया है। वहीं कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार का कहना है कि मामले में कोई शिकायत नहीं मिली है।
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पैसे नहीं जमा करने पर उपचार में देरी का आरोप
परिजन का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर स्टॉफ ने पहले 28 हजार रुपये जमा कराने की बात कही। उन्होंने स्टॉफ से अनुरोध किया कि वह पैसे की व्यवस्था कर रहे हैं, लेकिन पहले बच्चे का इलाज शुरू कर दिया जाए। इसके बाद एक अन्य स्टॉफ ने बताया कि बच्चे के इलाज में रोजाना करीब 70 हजार रुपये का खर्च आएगा और पहले पैसे जमा करने को कहा गया। इस कारण करीब एक से डेढ़ घंटे तक कोई उपचार नहीं किया गया। बाद में बताया गया कि बच्चे की मौत हो चुकी है। बच्चे को न तो कोई प्राथमिक उपचार दिया गया और न ही कोई पट्टी की गई। अगर समय पर इलाज मिलता तो शायद बच्चे की जान बच सकती थी।
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