घटना स्थल पर पुलिस अधिकारी मौजूद
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जिले में सोफा बनाने वाली एक फैक्ट्री में लगी आग में एक साथ तीन घरों के चिराग हमेशा के लिए बुझ गए। तीनों ने अपने बेटों को घर से दूर कमाने के लिए भेजा था, ताकि वह बुढ़ापे की लाठी बन सहारा बन सकें, घर का खर्चा चल सके, बहनोें की शादी कर सके, लेकिन उन्हे नही पता था कि वह हमेशा के लिए उन्हे इस तरह अलविदा कह देंगे। अपने भाई का शव देखने के लिए किसी की बहन तो किसी के भाई पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। जहां परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हो चुका था।
ग्रेटर नोएडा के बीटा 2 थाना क्षेत्र अंतर्गत सोफा गोदाम की फैक्ट्री में आग लगने से तीन कर्मचारियों की मौत हो गई। जिसके बाद मृतकों के परिजन सेक्टर 94 स्थित पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। मृतकों के परिजनों में फैक्ट्री मालिक पर लापरवाही का आरोप लगाया है और कहा कि अगर वहां अग्निशमन के उपकरण होते तो शायद आग बुझाई जा सकती है। उससे भी बड़ी गलती कि फैक्ट्री मालिक ने उन्हे रहने के लिए रूम तक नही दिया गया था, इसके कारण वह फैक्ट्री में ही रह रहे थे।
बिहार से कमाने आए दोनो कर्मचारियों की मौत
मृतक दिलशाद के भाई शाहबाज आलम ने बताया कि वह बिहार के अररिया जिले का निवासी है, पिछले एक साल पहले ही उसने काम शुरू किया था। उसके साथ ही बिहार से ही आने वाला एक और साथी मृतक मजहर आलम ने भी करीब एक साल पहले काम शुरू किया था। शाहबाज का आरोप है कि फैक्ट्री मालिक ने उन दोनो को रहने के लिए रूम न देकर फैक्ट्री में ही रखा। जिस जगह वह सोते और खाना- पीना बनाते थे, वह जगह इतनी सकरी थी कि वहां से एक इंसान भी सही से नही निकल सकता। वहां अगर थोड़ा भी सामान अगर रख दिया जाए तो आग लगने की स्थिति में अपनी जान बचाने के लिए भाग भी नही सकते। इतनी बड़ी लापरवाही करने वाले फ्रैक्ट्री मालिक पर कड़ी से कड़ी कार्रवाही होनी चाहिए।
चाचा बोले फैक्ट्री में रहने को किया था मजबूर
मृतक गुलफाम के चाचा सुल्तान खान ने बताया कि गुलफाम का परिवार मथुरा में रहता है। वह मथुरा से करीब 4 साल पहले यहां काम की तलाश में आया था। सोफा बनाने वाली कंपनी में काम मिला, लेकिन उसे रहने के लिए बाहर कमरा देने के बजाय फैक्ट्री में रहने के लिए मजबूर किया गया। वहां अग्निशमन के कोई भी इंतजाम नही थे, जिसके कारण यह हादसा हुआ।