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Noida News: बाढ़ से हजारों मकान कमजोर, वापस लौटना होगा खतरनाक

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बाढ़ से हजारों मकान कमजोर, लौटना होगा खतरनाक

- एनडीआरएफ और राजस्व विभाग की टीम तैनात, मकानों की होगी जांच
- छिजारसी, चोटपुर, कुलेसरा, युसुफपुर और चकशाहबेरी में सबसे ज्यादा खतरा
- पानी उतरने के बाद घर लौटने को तैयार हैं लोग, रोकना होगा मुश्किल
नवीन कुमार
ग्रेटर नोएडा। हिंडन की बाढ़ ने हजारों मकानों की नींव कमजोर कर दी है। वहां लौटना खतरनाक साबित हो सकता है। बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित नोएडा और ग्रेटर नोएडा के छिजारसी, चोटपुर, युसुफपुर चकशाहबेरी और कुलेसरा गांव में बड़ी संख्या में मकान हिंडन के किनारे पर बने हैं। जिनके गिरने का खतरा ज्यादा है। ऐसे में प्रशासन के सामने लोगों को रोकने की चुनौती होगी। हालांकि प्रशासन ने इन गावों में एनडीआरएफ और राजस्व विभाग की टीमें तैनात कर दी हैं। टीम जांच के बाद ही लोगों को मकानों में भेजेगी। असुरक्षित मकानों में लोगों को रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसी इमारतें गिरा दी जाएंगी।

हिंडन की बाढ़ से डूब क्षेत्र के 10 से अधिक गांव जलमग्न हो गए। यहां हजारों मकानों में दो से 10 फीट तक पानी भरा है। इन गांवों से 10 हजार से अधिक मकानों को खाली कराया गया है। फिलहाल छिजारसी, चोटपुर, हैबतपुर, युसुफपुर चकशाहबेरी, कुलेसरा, अलीवर्दीपुर गांव के मकानों में पानी भरा हुआ है। लगातार चार दिन में बाढ़ के दौरान पानी के तेज बहाव ने मिट्टी काट दी है। इससे किनारे पर बने मकानों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। मिट्टी कटने से नींव कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है।
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ऐसे में मकानों में जाना खतरे से कम नहीं होगा। अब पानी कम होने लगा है तो लोग लौटने की तैयारी कर रहे हैं। कुछ लौट भी चुके हैं। प्रशासन के सामने उनको रोकने की चुनौती होगी। हालांकि प्रशासन का कहना है कि अभी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में जाने पर रोक है। जांच के बाद मकानों को सुरक्षित घोषित किया जाएगा। असुरक्षित मकानों में लोगों को वापस लौटने नहीं दिया जाएगा।

नींव में पानी भरने से शाहबेरी में गिरी थी दो इमारतें

17 जुलाई, 2018 की रात शाहबेरी गांव में दो बहुमंजिला इमारतें गिर गईं थीं। वहां पानी निकासी की व्यवस्था नहीं थी। बारिश का पानी गलियों में भरा हुआ था। पानी इमारतों की नींव में जा रहा था। नींव में पानी भरने से हादसा हुआ था। हादसे में नौ लोगों की मौत हुई थी। उस घटना के बाद शाहबेरी के लोग हर बारिश में घबरा जाते हैं।

डूब क्षेत्र में मिट्टी की पकड़ होती है कमजोर

वास्तुकार वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि डूब क्षेत्र में निर्माण पर रोक है। वहां मिट्टी की पकड़ काफी कमजोर होती है। उसके बाद भी लोगों ने मकान बना लिए है। बाढ़ में डूबे मकानों को नुकसान पहुंचा होगा। उनकी नींव कमजोर हो गई होगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इन मकानों को बिल्डिंग बॉयलॉज के हिसाब से भी नहीं बनाया गया है। मकानों की नींव जमीन के अंदर ज्यादा गहरी नहीं होगी। किनारे के मकानों में पानी से मिट्टी हटने की वजह से ऐसे में मकानों के असुरक्षित होने की आशंका है।
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में एनडीआरएफ और राजस्व टीमें तैनात हैं। दोनों टीम पानी उतरने के बाद मकानों की जांच करेगी। जो मकान असुरक्षित होंगे। उनमें लोगों को जाने नहीं दिया जाएगा। - मनीष कुमार वर्मा, जिलाधिकारी
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