ऊना। जिले में तैयार होने वाली आलू की फसल इस बार मंडियों में देरी से पहुंचेगी। हर वर्ष पंजाब, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों से आने वाली आलू की खेप से पहले ऊना में तैयार होने वाला आलू मंडियों में दस्तक देता था। करीब 20 दिन बाद अन्य राज्यों से यह फसल मंडियों में आती है लेकिन इस बार करीब 20 दिन देरी से बिजाई के कारण फसल देरी से तैयार होगी। ऐसे में अन्य राज्यों के साथ ही जिला में तैयार आलू भी मंडियों में पहुंच पाएगा। इसका सीधा असर फसल की कीमत पर होना तय है जिसका डर किसानों को भी सता रहा है।
जानकारी के अनुसार ऊना में इस बार 1500 हेक्टेयर जमीन पर आलू की फसल तैयार की जा रही है। बिजाई प्रक्रिया अभी जारी है। भारी बरसात के कारण फसल की बिजाई सितंबर माह के शुरुआती दिनों में संभव नहीं हो पाई। अधिकतर किसानों ने 20 सितंबर के आसपास फसल की बिजाई की है। इन्हीं दिनों में पंजाब सहित अन्य राज्यों में बिजाई चल रही है। फसल तैयार होने में दो माह का समय लगता है। कुल मिलाकर 25 नवंबर के आसपास तैयार फसल को मंडियों में पहुंचाया जाना संभव है। इन्हीं दिनों में अन्य राज्यों से फसल भी पहुंचेगी। फसल की अच्छी आमद होने पर सीधा असर कीमतों पर होगा। हालांकि किसानों को फसल की शुरुआती कीमत अच्छी मिल सकती है लेकिन जब अन्य राज्यों से भी बड़ी मात्रा में आलू की खेप पंजाब और दिल्ली की मंडियों में पहुंचेगी, उससे दाम में गिरावट तय है। ध्यान रहे की आलू की फसल के दाम पहले से तय नहीं रहते। इसकी कीमत कम या अधिक होती रहती है।
किसान रघुवीर सिंह, अजयपाल, सुरेंद्र कुमार, बलराम, रोहित कुमार, सुरेश कुमार सहित अन्य ने बताया कि आलू की बिजाई में खाद, बीज, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी मिलाकर हजारों रुपये खर्च होते हैं। इसमें प्रतिदिन की मेहनत अलग से करनी पड़ती है। उन्हें फसल से अच्छी आय की भी उम्मीद रहती है। अगर अन्य राज्यों के साथ आलू की खेप मंडी पहुंचती है तो दाम गिरने की संभावना अधिक है। हालांकि अगर मांग अच्छी रहे, तब दामों पर असर नहीं पड़ता।
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कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि आलू की बिजाई अच्छे तरीके से जारी है। इसमें फिलहाल मौसम की बाधा नहीं है। बिजाई में कुछ दिन की देरी बेशक हुई लेकिन इससे पैदावार पर कोई असर नहीं होगा। उन्होंने उम्मीद जताई की किसान इस फसल से अच्छा लाभ कमाएंगे।