नोएडा। लॉकडाउन में जितना अहम शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना है। उतना ही आवश्यक इस समय मानसिक समस्याओं पर ध्यान देना भी है। अचानक बदली जीवनशैली, पाबंदियां मानसिक समस्याओं को बढाने में मददगार हो सकती हैं। ऐसे में डिप्रेशन, एंजाइटी, बीपी आदि समस्याओं से बचने के लिए खुद का ख्याल रखना आवश्यक है। इस समय कई व्यक्ति यह सोचकर भी परेशान हैं कि लॉकडाउन में चाहकर भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए चिकित्सीय सलाह नहीं ले पाएंगे । क्योंकि अधिकांश अस्पतालों की ओपीडी बंद है। डाक्टरों के निजी क्लीनिक पर ताले लगे हैं । इन बदले हालात में जहां मानसिक समस्याओं के बढने की संभावना अधिक है। वहीं दूसरी ओर इनके इलाज के लिए क्या करें इसकी जानकारी लोगों को कम है। लॉकडाउन के इस मुश्किल दौर में भी कई ऐसे विकल्प हैं जिनकी मदद से मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखा जा सकता है।
ऑनलाइन एवं टेलिफोनिक परामर्श- भले ही इस समय अस्पताल जाना मुश्किल हो। लेकिन बहुत से अस्पताल टेलिफोनिक एवं ऑनलाइन परामर्श का विकल्प दे रहे हैं । इसकी मदद से अस्पताल जाए बिना मानसिक समस्याओं से बचने में मदद ली जा सकती है। ऐसी सेवाओं में घर बैठे ही आप अपने डाक्टर से अपनी सभी समस्याएं शेयर करके मदद प्राप्त कर सकते हैं ।
छात्रों को मिलेगी मदद - लॉकडाउन का असर छात्रों एवं शैक्षणिक गतिविधियों पर भी पड रहा है । इस समय करियर की चिंता में परेशान छात्रों की मानसिक दिक्कतें बढ रही हैं । ऐसे में छात्रों की मदद के लिए कई तरह के सरकारी गैर सरकारी काउंसलिग प्लेटफार्म उपलब्ध हैं । एनसीआरटी ने अपनी वेबसाइट पर हर रीजन में छात्रों की मदद के लिए एक ऑनलाइन काउंसलिग सत्र शुरू किया है। जिसकी जानकारी एनसीआरटी की ऑफिशियल वेबसाइट से ली जा सकती है। सोमवार से शुक्रवार तक निश्चित समय के लिए एनसीआरटी टेलिफोनिक काउंसलिग की सुविधा देता है।
ऑनलाइन योगा प्रशिक्षण- योगा मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने में बेहद मददगार है। लाकडाउन के दौरान आप ऑनलाइन योगा ट्रेनिंग लेकर अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रख सकते हैं । कई ऐप, वेबसाइट इसकी सुविधा देती हैं । कई ट्रेनर व्यक्तिगत तौर भी ऑनलाइन प्रशिक्षण देते हैं । अर्बन क्लेप, क्योर फिट जैसे कई ऐप इसमें मददगार हो सकते हैं।
हॉबी को दे समय - मानसिक समस्याओं से बचने के लिए अपनी हॉबी को समय देना भी बेहतर है । मनोचिकित्सकों के अनुसार इस समय हॉबी से जुड़ने से मानसिक उलझनें कम होती हैं और सकारात्मक विचार बढ़गे । गायन, लेखन, डांस, पेटिंग जैसे कार्यों से जुडना वर्तमान समय में बेहतर उपाय है। जितना हो सके अपने समय को रचनात्मक कार्यों में लगाएं । इससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहेगा।