दो देशों के शहरों के बीच होगा सिस्टर सिटी एग्रीमेंट, ग्रेनो में बढ़ेगा निवेश
- सीईओ एनजी रवि कुमार व लोउडन काउंटी सिटी के निदेशक की हुई बैठक
- दोनों शहरों के बीच कई क्षेत्रों में सूचना के आदान-प्रदान में होगी सहूलियत
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। भारत और अमेरिका के दो शहरों के बीच जल्द ही आर्थिक व्यापारी, शैक्षणिक और पर्यावरण आदि क्षेत्रों में जल्द ही निवेश के लिए करार होगा। इसके लिए अमेरिका के लोउडन काउंटी सिटी का प्रतिनिधि मंडल ग्रेनो प्राधिकरण में आया। यहां पर प्राधिकरण अधिकारियों ने अपने प्रोजेक्टों का प्रस्तुतीकरण दिया तो अमेरिकी प्रतिनिधि मंडल ने जल्द ही निवेश करने का आश्वासन दिया है।
ग्रेटर नोएडा और अमेरिका के लोउडन काउंटी सिटी के साथ सिस्टर सिटी के रूप में एग्रीमेंट करने के लिए प्राधिकरण काफी लंबे समय से प्रयास कर रहा था। कुछ दिन पहले 16 जनवरी को प्रतिनिधिमंडल ने आने की बात कही थी। मंगलवार को अमेरिका के लोउडन काउंटी सिटी वर्जीनिया के आर्थिक विकास विभाग के कार्यकारी निदेशक बडी राइजर तीन अन्य प्रतिनिधियों के साथ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण आए। यहां पर प्राधिकरण की ओर से लोउडन काउंटी सिटी के प्रतिनिधियों के समक्ष प्रस्तुतिकरण दिया। इसमें प्राधिकरण ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर, यहां के तमाम इंफ्रास्ट्रक्चर, मेट्रो कनेक्टीविटी, कई एक्सप्रेसवे, हरियाली, शिक्षण संस्थानों, डाटा सेंटर हब, आईआईटीजीएनएल, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब व मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब आदि का प्रस्तुतिकरण दिया गया। यह सब देखकर अमेरिकी प्रतिनिधि मंडल काफी आकर्षित हुआ और जल्द ही एमओयू की कार्रवाई काे आगे बढ़ाने की बात कही। प्रतिनिधि मंडल ने सिस्टर सिटी एग्रीमेंट के लिए प्राधिकरण की ओर से मिलने वाले रेस्पांस की भी सराहना की। लोउडन काउंटी के निदेशक बडी राइजर ने डाटा सेंटर, शैक्षणिक विकास, पर्यावरण आदि क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश की संभावना जताई। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने आईआईटीजीएनएल समेत ग्रेटर नोएडा के कई स्थानों पर भ्रमण कर इंफ्रास्ट्रक्चर को देखा।
क्या है सिस्टर सिटी एग्रीमेंट
दो शहरों के बीच आपसी तालमेल के तहत शिक्षा, व्यापार, संस्कृति, बायोटेक, कृषि, फार्मास्यूटिकल, सूचना औैर तकनीक आदि का सीधे आदान-प्रदान करने में सहयोग मिलेगा। इससे हर स्तर से बेहतरी होने की संभावनाएं बढ़ेंगी। वाराणसी, लखनऊ, आगरा आदि कई शहरों का करार अलग-अलग देशों के शहरों के साथ किया जा चुका है और उनका इन शहरों को काफी लाभ भी मिल रहा है। जबकि विदेशी शहरों को भारतीयों से इसका लाभ मिल रहा है।
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दो देशों के दो शहरों के बीच करार होना पहली बात नहीं है। इससे रिश्तों में तो मधुरता आएगी ही, साथ ही विकास और कई तरह से तरक्की भी होगी। जल्द ही दोनों देशों के शहरों के बीच करार होगा।
रवि कुमार एनजी,सीईओ ग्रेनो प्राधिकरण