संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में आयोजित साप्ताहिक सत्संग साध्वी वंशिका भारती संगत को बताया कि प्रत्येक मनुष्य के जीवन में संघर्ष होता है। हमारे संत महापुरुषों ने कहा कि जो संसार में दुख एवं संघर्ष दिखाई देते हैं,वो मनुष्य की पीड़ा का वास्तविक कारण नहीं है अपितु बार-बार जन्म लेना और मृत्यु को प्राप्त होना ही सभी कष्टों का मूल है।
उन्होंने कहा कि माता के गर्भ में नौ महीने तक उल्टा लटके रहना, प्रसव पीड़ा से पैदा होना और आजीवन जिस तन के लिए बहुत से साधन व सुख सुविधाएं इक्ट्ठा की, उसी को एक दिन सदा के लिए छोड़कर जाना एक भयावह संघर्ष है। प्रत्येक मनुष्य अपने जीवन में संघर्ष करता है किंतु यह बात अधिक महत्वपूर्ण है कि वह किस दिशा में संघर्ष कर रहा है।
साध्वी ने कहा कि जैसे एक नदी के दिशा उसकी गति से अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि उसकी दिशा सागर की ओर होती है तो उसका आगे बढ़ने का संघर्ष कदाचित सार्थक हो जाता है, किंतु वो ही नदी मरुस्थल की ओर मुड़ जाए तो वह सदा के लिए अपना अस्तित्व खो देती है। संघर्ष से कभी भयभीत नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कोयले की खदान से ही हीरा बन कर वो कोयले का टुकड़ा निकलता है जो चट्टानों के दबाव के तले कई वर्षों तक संघर्ष करता है। हम सभी को यह सुअवसर प्राप्त हुआ है कि हम दिशा का चुनाव कर सकते हैं किंतु जब हमारा मिथ्या अहंकार, संकीर्ण सोच और स्वार्थ आड़े आता है तो हम चाहते हुए भी सही दिशा का चुनाव नहीं कर पाते है।
इससे हम जीवन में भटककर पतन की ओर अग्रसर हो जाते हैं, किंतु एक जिज्ञासु, श्रद्धा युक्त जीवात्मा गुरु भक्ति को अपने जीवन में स्थान देता है क्योंकि वह जानता है कि शास्त्र सम्मत विधि के द्वारा गुरु की शरणागत होकर ही हम मनुष्यत्व से देवत्व की ओर अग्रसर हो कर जीते जी मोक्ष प्राप्ति का साधन कर सकते हैं।
सत्संग में प्रवचन करतीं साध्वी वंशिका भारती। आयोजक