जहांगीरपुर के प्राचीन शिव मंदिर के प्रांगण में चल रही श्री शिव महापुराण कथा। स्रोत मंदिर
जहांगीरपुर (संवाद)। चंद्रमा की सुरक्षा के लिए भोलेनाथ ने उन्हें अभयदान दिया था और उन्हें दक्ष प्रजापति के श्राप से मुक्त किया था। इसके साथ ही भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने शीश पर भी धारण किया था, जिसके बाद उनका एक नाम चंद्रशेखर भी पड़ा था। भगवान से मिले अभयदान के कारण ही चंद्रमा की जान बच सकी थी। यह बात सोमवार को प्राचीन शिव मंदिर में चल रही श्रीशिव महापुराण की कथा के चौथे दिन कही गईं। सावन के पहले सोमवार पर कथावाचक आचार्य मुकेश कृष्ण शास्त्री ने चंद्रवार (सोमवार) भगवान शिव को क्यों प्रिय हैं और दक्ष प्रजापति के जरिये चंद्रमा को मिले श्राप की कथा भी सुनाई। कथा के दौरान आकाश, मनीष जादौन, कालीचरण, कविता, पूनम, ललित मोहन समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।