-ध्यानार्थ-कानपुर, एटा व बहराईच यूपी के लिए उपयोगी -
- मुंबई के गणेश विसर्जन समारोहों में चोरी किए थे सभी मोबाइल फोन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने एक अंतरराज्यीय गिरोह के चार सदस्यों को चोरी किए गए 45 हाई-एंड मोबाइल फोन के साथ गिरफ्तार किया है। इन्होंने मुंबई में लालबागचा राजा गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान भीड़भाड़ का फायदा उठाकर उच्च कीमत वाले मोबाइल फोन चुराए थे।
अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त विक्रम सिंह के अनुसार गिरफ्तार आरोपी सीमापुरी, दिल्ली निवासी मोहम्मद शकील (49) पुत्र मोहम्मद शमीम, शुक्लागंज, थाना गंगा घाट, जिला कानपुर, उत्तर प्रदेश निवासी मोहम्मद शफीक (34) पुत्र मोइनुद्दीन, नंद नगरी दिल्ली निवासी शमशुल हसन (40) पुत्र जियाउल हसन, चमनगंज थाना बेगमगंज जिला कानपुर उत्तर प्रदेश निवासी दिलशाद (36) पुत्र सादिक अली चोरी के इन मोबाइल फोन को नेपाल तस्करी करने की योजना बना रहे थे। उन्होंने बताया कि यह गिरोह मुंबई के जुहू चौपाटी और लालबागचा राजा विसर्जन जुलूस में बड़े पैमाने पर चोरी की वारदातों में लिप्त था।
पुलिस टीम ने आरोपियों को मुंबई से ट्रेन द्वारा दिल्ली लौटते हुए ट्रैक किया। उनकी मोबाइल लोकेशन के आधार पर पता चला कि वे हरिद्वार एक्सप्रेस में सवार थे। मथुरा रेलवे स्टेशन पर पुलिस की एक टीम ने ट्रेन में सवार होकर चारों आरोपियों को हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर पकड़ लिया। पूछताछ में पता चला कि कानपुर निवासी मोहम्मद शकील गिरोह का सरगना है। मुंबई पुलिस ने 6 सितंबर को गिरोह के किंगपिन कमरान उर्फ सादिक को गिरफ्तार किया था, जबकि बाकी आरोपियों ने दिल्ली लौटने के लिए ट्रेन पकड़ ली थी।
कई राज्यों में मामले दर्ज हैं-
पुलिस ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में भी आपराधिक मामले दर्ज हैं। शकील को पहले मंडोली, अजमेर और प्रयागराज की जेलों में जा चुका है। अन्य आरोपियों के खिलाफ चोरी, झगड़े और हथियार संबंधी मामले दर्ज हैं। बरामद फोन में से कम से कम पांच को मुंबई पुलिस की प्राथमिकी से जोड़ा जा चुका है।
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कई वर्षों से चला रहा था गिरोह-
मोहम्मद शकील पिछले 13-14 वर्षों से अपने साथियों मोहम्मद शफीक, शमशुल हसन, दिलशाद, अपने सगे भाई कामरान उर्फ सादिक और अल्लाह रक्खा के साथ मिलकर मोबाइल चोरी का गिरोह चला रहा है। वह पहले कटरा (जम्मू-कश्मीर), अजमेर (राजस्थान), प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) और मंडोली जेल (दिल्ली) में बंद रह चुका है। चोरी के मोबाइल अक्सर रूपरिया, बहराइच (उत्तर प्रदेश) ले जाए जाते थे, जहां उन्हें रिजवान (जो अब नेपाल में रहता है) नामक व्यक्ति को उसके भाई शोएब के माध्यम से बेच दिया जाता था। मोहम्मद शफीक लगभग चौदह साल पहले गिरोह में शामिल हुआ था। वह लगभग आठ साल पहले शकील के साथ अजमेर, राजस्थान में और बाद में उन्नाव और कानपुर (उत्तर प्रदेश) में जेल गया था।
तिहाड़ में बंद रहा-
दुंदवारा, जिला एटा (उत्तर प्रदेश) का मूल निवासी आरोपी शमशुल लगभग पंद्रह साल पहले, वह झगड़े के एक मामले में तिहाड़ जेल में बंद था। लगभग एक साल पहले वह मोहम्मद शकील के संपर्क में आया और उसकी खराब आर्थिक स्थिति के कारण गिरोह में शामिल हो गया। दिलशाद पहले कानपुर में चमड़ा उद्योग में काम करता था। कामरान उर्फ सादिक ने उसे शकील से मिलवाया था और गरीबी के कारण वह गिरोह में शामिल हो गया। वह पहले चाकूबाजी के एक मामले में कानपुर जेल में और बाद में शराब और हथियारों के मामलों में कानपुर और मंडोली जेल में भी बंद रह चुका है।