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नोएडा: नोएडा हाट

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महिलाओं के हुनर को मिले पंख, हस्तशिल्प से निकली आत्मनिर्भरता की राह
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- नोएडा हाट में चल रहे सरस मेले के दौरान विविध उत्पाद कर रहे लोगों को आकर्षित
- झारखंड की जूलरी व ओडिशा की साड़ी ने मोहा मन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समा
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-33 स्थित नोएडा हाट में ग्रामीण विकास मंत्रालय एवं राष्ट्रीय ग्रामीण विकास व पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडीपीआर) की ओर से आयोजित सरस आजीविका मेले के तीसरे दिन रविवार की छुट्टी के चलते भारी भीड़ उमड़ी। यहां लोगों ने विभिन्न राज्यों के उत्पादों की जमकर खरीददारी करने के साथ ही इंडिया फूड कोर्ट में विभिन्न राज्यों के व्यंजनों का स्वाद चखा।
इंडिया फूड कोर्ट के कोर्डिनेटर श्रेयस कश्यप ने बताया कि यहां देश भर के 20 राज्यों की 80 गृहणियों के समूह ने अपने प्रदेश के प्रसिद्ध क्षेत्रीय व्यंजनों के स्टाल लगाए हैं। राजस्थानी कैर सागरी गट्टे की सब्ज़ी से लेकर बंगाल की फिश करी, तेलंगाना का चिकन, बिहार का लिट्टी चोखा, पंजाब का सरसों का साग व मक्के की रोटी, प्राकृतिक खाद्य उत्पाद, हरियाणा के बाजरे व ज्वार के लड्डू बिस्कुट, कर्नाटक व जम्मू कश्मीर के ड्राई फ्रूट सहित भारत के विभिन्न हिस्सों से यहां पकवान मौजूद हैं। एक मार्च से पांच मार्च तक यहां मिलेट्स फीस्ट का भी आयोजन किया जाएगा। सिक्कम की सुनीता गडैली ने अपने गोदावरी स्वयं सहायता समूह का स्टाल लगाया है, जिसमें विभिन्न प्रकार के मोमोज तथा सूप के स्वाद लोगों ने चखा। वहीं मिजोरम के शेजवान राइस, स्पेशल मिजो टी तथा मिजो सुगर का भी लोगों ने आनंद उठाया। एनआईआरडीपीआर के असिस्टेंट डायरेक्टर चिरंजीलाल कटारिया ने बताया कि 17 फरवरी से पांच मार्च तक चलने वाले इस उत्सव में देश के विभिन्न राज्यों के आकर्षक उत्पादों को किफायती कीमत में खरीदा जा सकता है।
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सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
रविवार को त्यागराज सेंटर फॉर म्यूजिक एंड डांस की छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुति देकर दर्शकों का मन मोह लिया। इस बार मेले में 85 से ज्यादा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। रविवार को विश्व प्रसिद्ध जादूगर जितेन्द्र सिंह बब्बर ने मैजिक शो के माध्यम से कार्यक्रम की रोचकता बढ़ाई।
झारखंड की चांदी से चमका कॅरिअर
झारखंड निवासी स्टाल संचालक पार्वती सोनी ने बताया कि उनके मायके व ससुराल दोनों जगह चांदी के आभूषणों का कारोबार होता है। लेकिन महिलाओं को बाहर निकलकर व्यापार बढ़ाने का जरिया सरकारी योजनाओं के माध्यम से मिला। मेले के जरिए रहने, खाने और अपनी विशेषताओं को दूसरे राज्यों तक ले जाने का मौका मिलने की खुशी है। महिला मंडल के जरिए सरस से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकीं। उनके स्टाल पर 1500 से सात हजार तक के उत्पाद मौजूद हैं।

हाथों के हुनर ने बनाया आत्मनिर्भर
ओडिशा से आई ममता बताती हैं कि उन्होंने एक लंबा वक्त गृहणी के तौर पर गुजारा है। वह आत्मनिर्भर बनना चाहती थीं लेकिन रास्ता समझ नहीं आ रहा था। सरस के जरिए 30 महिलाओं के समूह को हथकरघे का प्रशिक्षण मिला। हमारे उत्पाद यहां भी लोगों को खासा पसंद आ रहे हैं। साड़ियों व सूट पर परंपरागत कारीगरी करते हैं, जिसमें काफी वक्त लगता है। लेकिन यह देखने में बेहद अलग और आकर्षक होते हैं।
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पारिवारिक व्यवसाय को दिया नया रूप
तेलंगाना से आए लक्ष्मण बताते हैं कि लकड़ी के आकर्षक उत्पादों का निर्माण उनके परिवार में कई पीढि़यों से चल रहा है। नयापन लाकर काम को और आगे ले जाने का श्रेय उन्होंने अपनी बेटी प्रियंका को दिया। प्रियंका ने सरकारी योजना के जरिए कारीगरी का प्रशिक्षण लिया और सरस मेले से जुड़ गई। लकड़ी के बने चिड़ियां, चिड़ियों के घोसले व मनोरंजक बोलने वाले खिलौने लेकर आए हैं।
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