- उमस और नमी में तेजी से पनपता है फंगस, खुजली-दाद को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
नितेश कुमार
ग्रेटर नोएडा। मानसून की दस्तक के साथ ही फंगल त्वचा संक्रमण के मामलों में भारी तेजी देखी जा रही है। कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) सहित विभिन्न अस्पतालों में खुजली, दाद, लाल चकत्ते और त्वचा में जलन की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हुई है। जिम्स के त्वचा रोग विभाग की ओपीडी में पिछले कुछ दिनों के भीतर फंगल संक्रमण से पीड़ित मरीजों की संख्या में करीब 10 से 15 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है।
चिकित्सकों के अनुसार, बारिश के मौसम में हवा में नमी (ह्युमिडिटी) का स्तर बहुत बढ़ जाता है। अधिक पसीना आने और लंबे समय तक गीले या सीलन भरे कपड़े पहनने के कारण त्वचा पर फंगस तेजी से पनपने लगता है। शरीर के वे हिस्से जहां पसीना अधिक जमा होता है, जैसे बगल, गर्दन, कमर, जांघों के बीच और पैरों की उंगलियों के आसपास संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
जिम्स के कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. क्षितिज गोयल ने चेतावनी देते हुए कहा, कई मरीज त्वचा में खुजली होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के मेडिकल स्टोर से स्टेरॉयड युक्त क्रीम खरीदकर लगा लेते हैं। यह बेहद खतरनाक है। इससे अस्थाई रूप से तो आराम मिल जाता है, लेकिन संक्रमण पूरी तरह खत्म नहीं होता। बाद में यही संक्रमण और अधिक गंभीर व जटिल रूप ले लेता है।
जिम्स के त्वचा रोग विभाग की प्रमुख व असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पीहू सेठी ने बताया कि बारिश के मौसम में बच्चों, बुजुर्गों, मधुमेह (डायबिटीज) के रोगियों और कमजोर इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
फंगल संक्रमण के प्रमुख लक्षण
- त्वचा पर गोल या लाल चकत्ते बनना।
- लगातार खुजली और जलन होना।
- त्वचा का छिलना या सफेद परत उतरना।
- पैरों की उंगलियों के बीच खुजली और दुर्गंध।
- प्रभावित हिस्से में जलन या दर्द महसूस होना।
ऐसे करें बचाव
- बारिश में भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनें।
- शरीर को साफ और पूरी तरह सूखा रखें।
- सूती और ढीले कपड़े पहनें।
- तौलिया, कपड़े और जूते साझा न करें।
- अधिक पसीना आने पर त्वचा को साफ और सूखा रखें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना स्टेरॉयड या एंटीफंगल क्रीम का उपयोग न करें।
- लक्षण दिखाई देने पर तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें।