कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डॉ. मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल परिसर में रेस्पेरेटरी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनेगा। यह सेंटर छह तल का होगा। इसमें सांस संबंधी सभी रोगों का इलाज होगा और फेफड़ों की सर्जरी भी होगी। सेंटर में चार अलग-अलग आईसीयू होंगे। साथ ही प्राइवेट कक्षों की भी व्यवस्था रहेगी। मेडिकल कॉलेज ने सेंटर की कार्ययोजना तैयार कर ली है। प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। सेंटर की प्रस्तावित लागत 49.5 करोड़ है।
रेस्पेरेटरी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ओपीडी के रोगियों के लिए भी अलग से व्यवस्था रहेगी। इससे बाहर से आने वाले रोगियों को दिक्कत नहीं होगी। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि इसी सेंटर में रोगियों की विभिन्न जांचें भी की जाएंगी। डायग्नोस्टिक और पैथोलॉजिकल दोनों तरह की जांचें होंगी। सेंटर में चार आईसीयू बनाए जाएंगे। इससे रोगी एक-दूसरे के संक्रमण से सुरक्षित रहेंगे।
उन्होंने बताया कि पहला आईसीयू सामान्य वक्ष रोगियों के लिए होगा। इसमें अस्थमा, सीओपीडी आदि मर्ज के रोगी रहेंगे। दूसरे आईसीयू में मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस (एमडीआर) रोगी रहेंगे। एमडीआर रोगियों के लिए अलग से वार्ड भी रहेगा। तीसरा आईसीयू टीबी के रोगियों के लिए होगा। चौथे आईसीयू में फेफड़ों की सर्जरी वाले रोगियों को रखा जाएगा। सेंटर में फेफड़ों के कैंसर की भी सर्जरी होगी। इसके अलावा फेफड़ों की गांठें वगैरह की भी सर्जरी की जाएगी।
डॉ. काला ने बताया कि सेंटर में विभिन्न प्रकार की लैब बनाई जाएंगी। एक तल पर लैब ही रहेंगी। इनमें रोगियों की जांच के अलावा शोध कार्य भी किया जा सकेगा। एक तल पर चार ऑपरेशन थिएटर रहेंगे। इसमें सर्जरी के अलावा ब्रांकोस्कोपी तथा दूसरी जांचें होंगी। सेंटर में चेस्ट हॉस्पिटल और सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ सर्जरी करेंगे। उन्होंने बताया कि सेंटर का काम पूरा होने में दो-ढाई साल लगेंगे। इससे नगर और आसपास के जिलों के रोगियों को राहत मिलेगी। उन्हें इलाज के लिए दूसरे शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। यहां पर दूसरे अस्पतालों के डॉक्टरों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
कोरोना के बाद सांस रोगों की जटिलताएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वायरल संक्रमण, मौसम के बदलाव, प्रदूषण बढ़ने में सांस रोगियों की तकलीफ बढ़ जाती है। जिन लोगों को कोरोना का जटिल संक्रमण हुआ था, उनकी सांस जल्दी फूलने लगती है। उनका कहना है कि कुछ रोगियों को अभी भी ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है।