संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। छठ मनाने के लिए घर जाने वाले प्रवासियों की परेशानी कम नहीं हो रही है। हालात ऐसे हैं कि कई लोग तीन-तीन दिन से स्टेशन पर पड़े हैं, लेकिन ट्रेन नहीं पकड़ पा रहे हैं। ट्रेन पकड़ने के लिए प्रवासियों की स्टेशन पर ही सुबह से शाम और शाम से सुबह हो रही है।
सामान्य बोगी तो दूर लोग शयनयान व वातानुकूलित बोगी में भी नहीं चढ़ पा रहे हैं। अत्याधिक भीड़ के कारण यात्रियों का सामान या परिवार के सदस्य स्टेशन पर ही छूट रहे हैं। जीआरपी और आरपीएफ ने परिवार व साथियों से बिछड़े तीन सदस्यों को दूसरी गाड़ियों से भेजा है। भीड़ के कारण इन दिनों लोगों को सीट नहीं मिल पा रही है। सभी ट्रेनें नोरूम पर चल रही है।
आरक्षण करवाने आने वाले लोगों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। मंगलवार को भी यमुनानगर जगाधरी स्टेशन पर अत्याधिक भीड़ रही। इस दौरान लोगों को ट्रेन पकड़ने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं व बच्चों के साथ सफर करने वाले लोगों को हो रही है। इस दौरान पत्नी व तीन बच्चों के साथ आए व्यक्ति की भीड़ के कारण ट्रेन छूट गई। सुमित पाल ने बताया कि उनकी फिरोजपुर से धनबाद जाने वाली गंगा सतलुज एक्सप्रेस में सीट आरक्षित थी।
वह ट्रेन पकड़ने पहुंचा लेकिन भीड़ बहुत ही ज्यादा थी। वह ट्रेन के दरवाजे तक ही नहीं पहुंच पाया। दो मिनट में ट्रेन छूट गई। इसके बाद वह पूरी रात पत्नी व बच्चों के साथ स्टेशन पर गुजारी। तड़के उसे सुरक्षा कर्मियों ने सियालदह एक्सप्रेस से रवाना हुआ।
नहीं कोई बंदोबस्त
ट्रेन पकड़ने आए पुष्पेंद्र ने बताया कि रेलवे की ओर से यात्रियों की सुरक्षा व सुविधा के लिए कोई बंदोबस्त नहीं किया गया है। लोग कई-कई दिन से स्टेशन पर हैं, लेकिन ट्रेन में नहीं चढ़ पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अत्याधिक भीड़ के कारण उनकी भी ट्रेन छूट गई। उम्र होने के कारण वे भीड़ का दवाब नहीं झेल सकते हैं। उन जैसे सैकड़ों यात्री इससे परेशान हैं।
तीन दिन से स्टेशन पर
रामबिलास ने बताया कि उन्हें बिहार जाना है। छठ पर परिवार उनका घर पर इंतजार कर रहा है। तीन दिन हो गए हैं, लेकिन वह ट्रेन नहीं पकड़ पाए हैं। कई बार प्रयास किया, लेकिन भीड़ के कारण वे ट्रेन नहीं पकड़ सके। तीन दिन से वह सुबह व शाम ट्रेन पकड़ने की कौशिश कर रहे हैं। स्टेशन पर होने से उनके सैकड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं। रेलवे को स्पेशल ट्रेनों का बंदोबस्त करना चाहिए।
भीड़ ज्यादा, ट्रेन उतनी ही
कमेरा ने बताया कि छठ के चलते ट्रेनों में भीड़ अत्याधिक बढ़ जाती है। हर साल रेलवे की ओर से चार-पांच आरक्षित सामान्य बोगी वाली साप्ताहिक व दैनिक विशेष गाड़ियां चलाई जाती थीं। परंतु इस बार रेलवे ने कोई ट्रेन नहीं चलाई जिसके चलते यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग ऐसे भी हैं जो वापस चले गए हैं और अपनी यात्रा ही रद्द कर दी है।