चारा और जमीन महंगी होने के कारण दूध का कारोबार करने वाले इससे बना रहे दूरी
राजेश भाटी
ग्रेटर नोएडा। जिले में हर साल दुधारु पशुओं की संख्या घटती जा रही है। पांच साल में 93 हजार दुधारु पशु कम हुए हैं। इससे दूध उत्पादन में भी करीब 35 फीसदी की कमी आई है। वहीं जमीन के रेट अधिक होने और चारा महंगा होने के कारण पशु पालन करने वाले लोग इस कारोबार को छोड़ रहे हैं।
गौतमबुद्धनगर में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के इलाकों में जमीनों अधिग्रहण होने के चलते किसानों की खेती की जमीन कम हो गई है। इस कारण किसानों ने पशुपालन बंद कर दिया है। वहीं जो जमीन बची है उसमें भी धान, गेंहू समेत सब्जी की बुआई होती है। इस क्षेत्र में हरे चारे की बुआई नहीं होती। चारा महंगा होने के कारण पशुपालन करने वाले लोगों की संख्या भी कम हो रही है।
पशु गणना के आंकड़ों के अनुसार, जिले में 2019 में गाय 78219, भैंस 238761. बकरी 16890 थीं। इन पशुओं का पालन दूध के लिए किया जाता था। इनकी कुल संख्या 3 लाख 33 हजार 870 थी। पांच साल बाद 2025 की पशु गणना के अनुसार कुल पशुओं की संख्या केवल 2 लाख 40 हजार 995 रह गई है। इनमें 64174 गाय, एक लाख 64 हजार 964 भैंस और 11855 बकरी और 2 ऊंट हैं। पांच साल में जिले में करीब 83 हजार दुधारु पशु कम हुए हैं।
पशुपालक विजेंद्र सिंह नागर ने बताया कि इन दिनों दूध का रेट 70 से 80 रुपये किलो चल रहा है लेकिन पशु को खाना, रख रखाव समेत खर्चे महंगे हो रहे हैं। इससे दूध की कीमत 100 रुपये से भी अधिक आ रही है। दूध बेचने के लिए पशुपालन करना घाटे का कारोबार है। इसके चलते पांच से दस भैंसों का पालन करके डेयरी चलाने वाले कारोबार बंद हो रहे है। जिले के ग्रामीण इलाकों में दुधारु पशुओं की संख्या कम होने से 30 से 35 फीसदी दूध का उत्पादन कम हो गया है। कई गांवों में इन दिनों ग्रामीण भी बाजार से थैली का दूध खरीद रहे है।
-हरे चारे के दाम बढ़ने और जमीनें महंगी होने के कारण पशुपालकों की संख्या कम हो रही है। पांच साल में 83 हजार दुधारु पशु कम हो गए हैं। दुधारू पशु पालन के लिए सरकार की कई योजनाएं चल रहीं हैं। बावजूद उत्पादन में बढ़ोत्तरी नहीं हो रही।
-अरुण कुमार सचान, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, गौतमबुद्धनगर