विवादित लेआउट प्लान प्रस्ताव को वापस लिया गया
महापौर राजा इकबाल सिंह ने बैठक में हिस्सा लिया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एमसीडी की स्थायी समिति की बैठक बृहस्पतिवार को पार्किंग व लावारिस कुत्तों सहित कई मुूद्दे उठे। बैठक में एक ओर निगम के प्रथम नागरिक महापौर राजा इकबाल सिंह स्वयं उपस्थित हुए और समिति के सदस्यों के साथ बैठकर चर्चा में हिस्सा लिया। वहीं, पिछली बैठक में पास हुए विवादित लेआउट प्लान प्रस्ताव को वापस लिया गया। ऐसा पहली बार हुआ कि जब किसी महापौर ने बैठक में हिस्सा लिया हो।
समिति की बैठक में अंडरहिल रोड पर बनाई जाने वाली ग्रुप हाउसिंग के लेआउट प्लान का प्रस्ताव वापस लिया गया। इसे लेकर भाजपा के भीतर डेढ़ महीने से घमासान मचा हुआ था। इसी विवाद के कारण समिति की बैठक लगातार टल रही थी। आप ने भी इस प्रस्ताव पर सवाल खड़े किए थे। आप पार्षदों ने बैठक में भी इस प्रस्ताव को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। खास बात यह है कि यह वही प्रस्ताव था जिसे तीन निगमों के एकीकरण से पहले उत्तरी निगम ने भी आपत्तियों के कारण वापस भेज दिया था। बैठक में स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पार्षदों की ओर से जनहित में उठाए गए सभी मुद्दों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाए और अगली बैठक में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
चांदनी चौक में जाम
बैठक में अन्य प्रमुख मुद्दा चांदनी चौक क्षेत्र की पार्किंग समस्या का रहा। आप पार्षदों ने कहा कि गांधी मैदान में मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण होने के बावजूद जाम की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। पार्षदों का कहना था कि वहां प्रति घंटा शुल्क लेने और मासिक पास की सुविधा न होने से इलाके के निवासी गाड़ियां सड़कों पर खड़ी कर देते हैं जिससे जाम की स्थिति बनी रहती है।
लावारिस गायों से दुर्घटनाएं
भाजपा पार्षद जगमोहन ने कहा कि लोग लावारिस कुत्तों व गाय और बंदरों से परेशान हैं। एमसीडी किसी से भी छुटकारा नहीं दिला पा रही। पार्षद अंजू ने कहा कि लावारिस कुत्तों की समस्या दिल्लीवासियों के लिए मुसीबत बनी हुई है। वहीं, सड़कों पर घूमती लावारिस गाय भी दुर्घटनाओं का कारण बन रही हैं। प्रत्येक जोन में एक-एक गोशाला स्थापित की जाए ताकि गायों को सुरक्षित ठिकाना मिले और सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं पर रोक लगे।
आर्थिक अधिकार बढ़ाने की मांग
भाजपा पार्षद राजपाल ने अधिकारियों के आर्थिक अधिकार बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त आयुक्त को 25 लाख, प्रमुख अभियंता काे 18 लाख, मुख्य अभियंता को 15 लाख, अधीक्षण अभियंता को 10 लाख और अधिशासी अभियंता को पांच लाख रुपये तक की योजनाओं को स्वीकृति देने का अधिकार दिया जाए। आप पार्षद राफिया ने अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। उन्होंने खुलासा किया कि पिछली बैठक में उन्होंने एक गंभीर विषय उठाया था जिसका अधिकारियों ने कोई उत्तर नहीं दिया।