संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा।
पुरानी बीमारी बताकर इलाज में खर्च हुई राशि का भुगतान करने से बीमा कंपनी इन्कार नहीं कर सकती है। कंपनी को बीमित राशि का भुगतान करना होगा। ऐसे ही एक मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने एचडीएफसी एर्गो हैल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को 6 फीसदी ब्याज समेत 2.15 लाख रुपये का भुगतान 30 दिनों में करने का आदेश दिया है। दो हजार रुपये वाद व्यय के भी देने होंगे। आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा ने सुनवाई की।
अधिवक्ता ने बताया कि ग्रेटर नोएडा के खैरपुर गांव निवासी सुरेंद्र ने 8 दिसंबर 2018 को स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली। बीमा कंपनी को 21694 रुपये के प्रीमियम का भुगतान किया। वह लगातार पॉलिसी चला रहे थे। 2020 में पॉलिसी को नवीनीकरण करा लिया। 17 अगस्त 2020 को बीमार होने पर नवीन अस्पताल अल्फा-2 में इलाज कराया। इलाज का समस्त खर्च का बीमा कंपनी ने भुगतान किया। उनका ओपीडी में इलाज चल रहा था, जिसके बिल बीमा कंपनी को भेजे गए। कंपनी ने क्लेम रद्द करने के बाद उनकी पॉलिसी को निरस्त कर दिया। बीमा कंपनी से संपर्क करने पर उनको बताया गया कि उनकी पुरानी पॉलिसी रद्द हो गई है। उनको नई पॉलिसी जारी कर दी। पॉलिसी के प्रीमियम के 17221 रुपये का 19 जून 2021 को भुगतान किया। 3 नवंबर 2021 को अचानक से तबीयत खराब हो गई। उनको नियो अस्पताल नोेएडा में भर्ती कराया। जांच में उनको ब्रेन स्टोक होने की जानकारी दी। चिकित्सक ने इलाज शुरू कर दी। अस्पताल को स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी की जानकारी दी गई। जरूरी दस्तावेज दे दिए गए। इलाज में 2.15 लाख रुपये का बीमा कंपनी ने भुगतान नहीं किया। उनको नकद भुगतान करना पड़ा। जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर करके बीमा कंपनी से इलाज में खर्च राशि का भुगतान कराने की गुहार लगाई। आयोग में सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बीमित पहले से ही डायबिटीज हाइपर टेंशन का रोगी था। बीमित ने उक्त बीमारियों का खुलासा पॉलिसी लेने के दौरान नहीं की थी। पॉलिसी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ली गई थी। बीमित व्यक्ति का दायित्व है वह अपनी पूर्व से बीमारियों का उल्लेख करता। बीमारियों का खुलासा नहीं किया। बीमित के दावा को निरस्त कर दिया।
दोनों पक्षों को सुनने और पेश किए गए तथ्यों के बाद आयोग ने माना कि जो बीमारी पाई गई थी इससे निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है पॉलिसी लेने से पहले से डाइबिटीज व हाइपर टेंशन की बीमारी विद्यमान थी। जिन बीमारियों का निदान उपचार के दौरान किया है। उच्च न्यायालय और राष्ट्रीय आयोग ने अनेकों निर्णयों में यह निर्धारित किया है कि डाइबिटीज व हाइपर टेंशन लाइफ स्टाइल की बीमारी है। इन बीमारियों के होने के आधार पर दावा निरस्त नहीं किया जा सकता है। क्लेम नहीं देकर बीमा कंपनी ने सेवा में कमी की है। आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि 6 फीसदी ब्याज समेत 2.15 लाख रुपये 30 दिन में भुगतान करेगी। दो हजार रुपये वाद व्यय के भी देने होंगे।