जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को छह फीसदी ब्याज सहित 30 दिन में राशि के भुगतान का आदेश दिया
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। बिना स्पष्ट कारण के बीमा कंपनी इलाज में खर्च राशि का भुगतान करने से इन्कार नहीं कर सकती। यह टिप्पणी करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को 6 फीसदी ब्याज समेत इलाज खर्च राशि का 30 दिन में भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा ने सुनवाई की।
नोएडा के सेक्टर-41 आगाहपुर निवासी करतार सिंह ने यूनाईटिड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के एजेंट हेमंत कुमार से 16,167 रुपये का भुगतान करके एक पॉलिसी ली। 19 मई 2019 को पहली बार नवीनीकरण कराते हुए कंपनी के एजेंट ने दूसरी पॉलिसी देकर 12,484 रुपये लिए। कंपनी के एजेंट ने उनको बताया कि हमारी कंपनी पूर्ण रूप से केसलेस पॉलिसी है। पॉलिसी करने के बाद आपको किसी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या होती है तो आप कंपनी द्वारा निर्धारित अस्पतालों में दाखिल होकर इलाज करा सकते है।
11 दिसंबर 2018 को उनका स्वास्थ्य खराब हो गया। उनको कैलाश अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज कराया गया। भर्ती होने की सूचना बीमा कंपनी को भी दी गई। बीमा कंपनी ने मैसेज के माध्यम से इलाज करने के लिए अपनी मंजूरी दी। अस्पताल ने इलाज शुरू कर दिया। इलाज के दो दिन के बाद अस्पताल को मैसेज आया कि कंपनी ने उनके मेल को रिजेक्ट कर दिया है जिसके बाद उनको इलाज में खर्च राशि 80 हजार रुपये का स्वयं भुगतान करना पडा।
इसके बाद पीड़ित ने जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया। आयोग में सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बीमा कंपनी के द्वारा जारी पॉलिसी के नियम व शर्तों के तहत खारिज किया था। आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि बीमा कंपनी ने कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है। बीमा कंपनी द्वारा किसी स्पष्ट कारण के बिना ही दावा निरस्त करना सेवा में कमी है। जिला उपभोक्ता आयोग ने 6 फीसदी ब्याज समेत इलाज खर्च राशि 80 हजार रुपये का 30 दिन में भुगतान करने का आदेश दिया है। पांच हजार रुपये वाद व्यय के भी देने होंगे।