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ट्रंप का टैरिफ वार : टैरिफ का असर दवा कारोबारियों पर रहेगा बेअसर

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-भारत दुनिया का सबसे बड़ा दवाई निर्यातक देशों में से एक
-कारोबारियों का अनुमान, अन्य बाजार और भी होंगे सक्रिय

माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ब्रांडेड व पेटेंट दवाओं पर सौ फीसदी आयात शुल्क की घोषणा अमेरिकी परिवारों को खासा प्रभावित कर सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत से अमेरिका निर्यात होने वाली दवाओं में 80 फीसदी जेनेरिक हैं, ऐसे में शहर समेत पूरे भारत से निर्यात होने वाली दवाइयां अमेरिकियों को महंगी पड़ सकती हैं। दवा कारोबारियों का दावा है कि उन्हें अन्य बाजार भी बड़े आराम से मिल जाएंगे।

गौतमबुद्ध नगर के दवा कारोबारियों ने बताया कि भारत दुनिया में सबसे ज्यादा दवाइयां निर्यात करता है। शहर के दवा व्यापारियों के अनुसार उनके द्वारा तैयार दवाइयां सिर्फ अमेरिका ही नही बल्कि जर्मनी, फ्रांस समेत कुछ अफ्रीकी देश में भी निर्यात की जाती है। लेकिन अगले माह से लागू होने वाले अमेरिका के इस टैरिफ से भारत को कम बल्कि अमेरिका को ज्यादा नुकसान हो सकता है। दरअसल इसका प्रमुख कारण भारत द्वारा जेनेरिक दवाइयों के निर्यात है। जेनेरिक दवाइयां आम तौर पर हर तरह के परिवार के लिए उनके बजट के अनुसार मिलने वाली दवाइयां हैं। ऐसे में अमेरिका में यदि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ बढ़ाया भी जाता है तो इससे अमेरिका में रह रहे नागरिकों को ही उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। वहीं भारत सिर्फ दवा निर्यात में मामले में अमेरिका पर ही निर्भर नही है, ऐसे में शहर के कारोबारियों को किसी बात की चिंता नही है। दुनिया में ऐसे कई देश हैं, जिन्हें भारत में निर्मित जेनेरिक दवाइयों की कीमत पता है, यानी उन्हें भी इन दवाइयों के मिलने की उम्मीद है।
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भारत दुनियाभर में करता है 2.70 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात
शहर के दवा कारोबारियों ने बताया कि सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, भारत हर साल पूरी दुनिया को 2.70 लाख करोड़ रुपये की दवाएं दे रहा है जिसमें 93 हजार करोड़ की दवाएं अमेरिका जा रही हैं। इसमें 65 हजार करोड़ रुपये की दवाएं जेनेरिक हैं, जिन्हें ट्रंप ने 100 फीसदी टैरिफ से बाहर रखा है। इनमें भी शहर से लगभग पांच करोड़ रुपयों की दवाइयों का निर्यात किया जाता है।
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कोट

शहर के दवा निर्यातकों को अमेरिका के इस टैरिफ से अंश मात्र ही फर्क पड़ेगा, हमारे पास अन्य देश बाजार के तौर पर उपलब्ध हैं।
-राजीव बंसल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, आईआईए

हम सिर्फ अमेरिका तक निर्भर नही हैं, बल्कि इस टैरिफ के चलते अमेरिका के नागरिकों को ही महंगी दवाइयां खरीदना पड़ेंगी।
-निशांत शर्मा, फार्मा मैन्युफैक्चरर
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