बिजनौर। इस बार गर्मी देर तक रही तो प्रवासी पक्षियों के आने में भी देरी नजर आ रही है। जहां हर साल अक्तूबर माह के अंत तक काफी संख्या में पक्षी दिखने लगते थे, वहीं इस साल यह संख्या बहुत कम नजर आ रही है। वन विभाग भी मान रहा है कि अब नवंबर माह के पहले पखवाड़े में इनकी संख्या बढ़ सकती है।
जिले में ब्लैकनेक्ड स्टोर्क, पेंटेड स्टोर्क, ग्रे बिलिड कूकू, हनी बजर्ड, ग्रे हॉनबिल, जकाना, ओपनबिल स्टोर्क, कॉटन पिजम, हेरोन आदि 200 से अधिक प्रजाति के पक्षी दिखते हैं। मुख्य रूप से ये पक्षी मंगोलिया, साइबेरिया, नार्वे सहित पूरे यूरोपियन देशों से यह पक्षी आते हैं। अक्तूबर के अंतिम सप्ताह तक काफी संख्या में प्रवासी पक्षी यहां पहुंचते हैं, लेकिन इस बार इनकी संख्या बहुत कम नजर आ रही है।
उप वन प्रभागीय अधिकारी ज्ञान सिंह ने कहा कि आने वाले दस दिनों में पक्षियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। बिजनौर बैराज, पीली डैम, हरेवली में पक्षियों के आने की प्रमुख जगह हैं। इनके प्राकृतिक वास के संरक्षण पर भी काम चल रहा है।
हाल ही में तलाशे गए थे 230 वेटलैंड
इस माह वन विभाग और राजस्व विभाग का संयुक्त सर्वे भी चल रहा है। शासन की ओर से बिजनौर के लिए सेटेलाइट सर्वे रिपोर्ट भेजी गई थी, जिसमें जिले में 230 वेटलैंड चिह्नित किए गए थे। इनका सत्यापन चल रहा है। जो शीघ्र पूरा होने वाला है।
यह हैं जिले में प्रवासी पक्षियों के प्रमुख ठिकाने
गंगा बैराज : गंगा बैराज की बहुत लंबी धारा है। यहां पर दिन में हर वक्त प्रवासी पक्षी रहते हैं। यहां इंडियन स्कीमर पक्षी हर समय उड़ान भरता हुआ देखा जा सकता है। आम भाषा में इसे पनचीरा कहते हैं। दिसंबर माह में 200 से ज्यादा प्रजाति के पक्षी यहां पर गंगा की लंबी धारा में देखे जा सकते हैं। बैराज के पुल के दोनों ओर गंगा की धारा में बने टापुओं पर बड़ी संख्या में पक्षियों को आराम करते हुए देखा जा सकता है। यहां पर सैलानियों को घुमाने के लिए मोटर बोट भी है। यह क्षेत्र हैदरपुर रामसर साइट घोषित हो चुका है।
रावली तट : रावली तट पर पहले से ही प्रवासी पक्षी रहते हैं। इसे टूरिस्ट प्लेस के रूप में विकसित करने की कोशिश भी की जा रही है। रावली तट हैदरपुर वेटलैंड के लगभग सामने ही पड़ता है। यहां पर देशी विदेशी प्रजाति के 100 से अधिक पक्षी आराम से देखे जा सकते हैं। गंगा के टीलों पर यहां सैकड़ों पक्षियों के झुंड देखे जा सकते हैं। यहां बारहसिंगा भी अब खूब फल फूल रहे हैं।
पीलीडैम : पीलीडैम अमानगढ़ के पास ही है। यहां पर प्रवासी पक्षियों के लिए मिट्टी के छोटे पहाड़ बनाने की योजना पर काम चल रहा है। इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। पीली डैम में प्रवासी पक्षी आराम से दिखते हैं। यहां पर मोटर बोट की सुविधा जल्द शुरू की जा सकती है। बोटिंग करते हुए पक्षियों की सुंदरता निहारने का अलग ही आनंद रहेगा।
अमानगढ़ : वैसे तो अमानगढ़ में आम आदमी का प्रवेश नहीं होता है, लेकिन यहां भी काफी प्रवासी पक्षी रहते हैं। यहां पर हाल ही में हिमालयन गिद्घों का बहुत बड़ा झुंड देखने को मिला था। यहां पर कुछ जगह पर बड़े मैदान हैं। इसके अलावा अमानगढ़ के पास ही बहने वाली नदी के किनारे भी बहुत पक्षी रहते हैं। जल्द ही आम जनता का यहां जाना संभव हो सकेगा।
कालागढ़ : कालागढ़ में रामगंगा नदी के किनारे भी बहुत प्रवासी पक्षी रहते हैं। गर्मियों में यहां सैलानियों को मोटर बोट से घूमाने की व्यवस्था भी रहती है। कालागढ़ में बाकी वन्यजीव भी बड़ी तादाद में रहते हैं। वन क्षेत्र की वजह से यहां घूमते हुए बाकी प्राकृतिक नजारों के साथ-साथ पक्षियों के सुंदर नजारे भी आराम से दिख जाते हैं।