रॉबर्ट्सगंज पीडब्लूडी डाक बगला में बैठक करते शिक्षक संगठन के पदाधिकारी। स्रोत स्वयं
सोनभद्र। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में आर-पार की लड़ाई का एलान किया है। रविवार को जिले में जगह-जगह बैठक की गई और 24 नवंबर को दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन की सफलता की रणनीति बनाई गई। इसके लिए कई शिक्षक नेताओं को जिम्मेदारी भी सौंपी गई। कहा गया कि अंतिम दम तक शिक्षकों के हित की लड़ाई लड़ी जाएगी।
पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में संगठन के अयोध्या जिलाध्यक्ष/जिले के प्रभारी डाॅ.संजय सिंह ने कहा कि टीईटी की अनिवार्यता शिक्षकों के लिए काला कानून लागू करने जैसा है। कहा कि इसके विरोध में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है। टीईटी की अनिवार्यता समाप्त कराने के लिए शिक्षकों से जुड़े 12 संगठनों ने एक साथ 24 नवंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन का निर्णय लिया गया है। बताया कि जिला इकाई की बैठक में इसको लेकर रणनीति भी बनाई गई है। प्रदेश सरकार की तरफ से शिक्षकों के हित में उठाए गए कदम की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से अभी इस तरह की कोई पहल सामने नहीं आई है। विवश होकर शिक्षकों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। जिलाध्यक्ष रवींद्र चौधरी ने कहा कि जिन लोगों की नौकरी 25 वर्ष से ऊपर की हो चुकी है उनके लिए टीईटी की अनिवार्यता लागू करना एक तरह का अन्याय है। इस मौके पर कोषाध्यक्ष विनोद, दिलीप, श्यामबिहारी मधुर, साधू, आशुतोष सिंह, नरेंद्र सिंह, संतोष सिंह, राजेंद्र, अछैबर सिंह, अजय कुशवाहा, शंकर सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।