दिलीप कुमार त्रिपाठी
केदारनगर (अंबेडकरनगर)। जौनपुर–भदोही फोरलेन पर हुए दिल दहला देने वाले हादसे ने इल्तिफातगंज क्षेत्र के परमदेव वर्मा के परिवार की खुशियां छीन लीं। बेटे आलोक वर्मा, बहू गुड़िया वर्मा और गर्भ में पल रहे आठ माह के जुड़वां बच्चों की मौत ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। पिता परमदेव वर्मा को वह पीड़ा झेलनी पड़ी, जिसकी कल्पना मात्र से रूह कांप उठती है। उन्होंने अपने जवान बेटे-बहू और दो अजन्मे पोतों को मुखाग्नि दी तो पूरा गांव रो पड़ा।
पिता परमदेव वर्मा का कहना है कि उसके घर में अगले माह किलकारियां गूंजने वाली थीं। तीन साल के वैवाहिक जीवन के बाद आलोक और गुड़िया अपने पहले संतान का स्वागत करने जा रहे थे। परिवार में इसकी तैयारियां चल रही थीं, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। मिर्जापुर से मां विंध्यवासिनी के दर्शन कर लौटते वक्त हुए हादसे ने परिवार की खुशियां मातम में बदल दीं। हादसे के समय वाहन चला रहे आलोक के बहनोई रवींद्र वर्मा को झपकी आ जाने से यह दर्दनाक हादसा हुआ। वे स्वयं गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। परिवार की छोटी बेटी रंजू वर्मा का रो-रोकर बुरा हाल है। कुछ ही दिन पहले बेटे के मुंडन संस्कार में आलोक और गुड़िया हंसी-खुशी शामिल हुए थे। किसी ने नहीं सोचा था कि वह मुलाकात आखिरी होगी। आंखों में आंसू लिए परमदेव वर्मा बार-बार यही कहते रहे कि मैंने आलोक को रोका था...बहू की तबीयत ठीक नहीं थी...लेकिन वह माता रानी के दरबार जाने की जिद पर अड़ा रहा। आज उसी यात्रा ने हमें उजाड़ दिया। जिस अग्नि को साक्षी मानकर आलोक और गुड़िया ने सात फेरे लिए थे, उसी अग्नि की लपटों में दोनों अपने अजन्मे बच्चों सहित सदा के लिए विलीन हो गए।
गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार
सोमवार तड़के जैसे ही दंपती के शव गांव पहुंचे, रातभर का सन्नाटा चीख-पुकार में बदल गया। परिवार ने स्थिति को देखते हुए पहले से ही दाह संस्कार की तैयारी कर रखी थी।सभी धार्मिक रस्में पूरी करने के बाद इल्तिफातगंज के शहजौरा घाट पर चारों पार्थिव देहों का अंतिम संस्कार किया गया। गांव में मातम पसरा रहा। हजारों की भीड़ नम आंखों से विदाई देने पहुंची। इस दौरान सांसद लालजी वर्मा, विधायक रामअचल राजभर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्याम सुंदर वर्मा, पूर्व एमएलसी विशाल वर्मा, बसपा नेता जितेंद्र कुमार वर्मा, पूर्व ब्लॉक प्रमुख लवकुश वर्मा, गंगाराम कनौजिया, ब्लॉक प्रमुख सुरजीत वर्मा, डीडीसी विजय यादव, तथा पूर्व जिलाध्यक्ष बसपा अरविंद गौतम समेत कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
सब कुछ बन गया सपना
मृतक आलोक का छोटा भाई अतुल वर्मा विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर चुका है और एमसीआई परीक्षा की तैयारी कर रहा था। परिवार में नई जिंदगी के स्वागत को लेकर वह बेहद उत्साहित था। अब सब कुछ सपना बनकर रह गया है।
मौत से जंग लड़ रहे तीन सदस्य
इसी हादसे में अहिरौली (जैनपुर) निवासी फूला देवी की भी मौत हो गई। उनके पार्थिव शरीर को गांव लाकर शहजौरा घाट पर ही आलोक और गुड़िया के पास चिता दी गई। पति रामचंद्र वर्मा ने नम आंखों से मुखाग्नि दी। उनके पुत्र रवींद्र वर्मा व उनकी पत्नी मंजू वर्मा का इलाज अभी भदोही के निजी अस्पताल में चल रहा है। दोनों की हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है। रवींद्र का पुत्र अभिराट वर्मा गंभीर अवस्था में लखनऊ के आइकॉन हॉस्पिटल में भर्ती है, जहां उसकी सर्जरी की गई है। तीनों अभी मौत से जंग लड़ रहे हैं।