बही हास्य रस की धार, शृंगार से किया फुहार
- अमर उजाला कवि सम्मेलन में गूंजे ठहाके, बजी तालियां
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-74 स्थित सुपरटेक केपटाउन में शनिवार को अमर उजाला की ओर से कवि सम्मेलन ‘काव्य कैफे’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केपटाउन साहित्य मंच सहयोगी भूमिका में रहा। काव्य कैफे में दस प्रसिद्ध कवियों हुक्का बिजनौरी, डॉ. अनिल बाजपेई, योगेंद्र सुंदरियाल, रोहित चौधरी, आलोक भदौरिया अर्श, डॉ. शुुमम त्यागी, शशि पांडेय, डॉ. ज्योति उपाध्याय, सपना सक्सेना और सौरभ सहज ने कविता पाठ कर श्रोताओं की वाहवाही लूटी। मौके पर सोसाइटी के स्थानीय कवियों ने भी मंच पर अपनी रचनाएं पेश की।
सबसे पहले अनु सिन्हा ने कथक नृत्य पेश कर भगवान गणेश और राम स्तुति कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद शुभम त्यागी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। साथ ही अपनी रचनाएं ’उत्सव व चूड़ियां’ पेश की। कविता समाप्त होने से पहले ही हॉल तालियों से गूंज उठा। मंच का संचालन रोहित चौधरी ने किया। उनकी वीर रस की कविता ’मुझको चाहत ने’ लोगों में ओज का संचार किया। वहीं कवि सतीश दीक्षित ने हास्य कविता, ‘जब प्यार किया’ से लोगों को जमकर हंसाया। कवि अनिल बाजपेई ने अपनी व्यंग्य रचना में सास-बहु के रिश्तों का जिक्र करते हुए राजनीतिक दलों की खिंचाई की। क्रांतिकारियों और ऐतिहासिक नायकों को समर्पित उनकी रचनाओं ने खूब तालियां बटोरीं।
कवियत्री सपना सक्सेना ने नारी को समर्पित रचना से वाहवाही पाई। साथ ही उनकी रचना ‘मुझको खुद से जुदा ना पाओगे’ ने शृंगार रस की अद्भुत छटा बिखेरी। हास्य कवि योगेंद्र सुंदरियाल ने मंच पर आते ही लोगों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी। उनकी रचना टूटी हुई दीवार के पत्थर ने लोगों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। उनके गीत एक बात सुनो ने भी वाहवाही बटोरी। आलोक भदौरिया अर्श ने अपनी शायरी ’ऐसे मौसम से’ दाद पाई। वहीं हुक्का बिजनौरी, शशि पांडेय, डॉ. ज्योति उपाध्याय, सौरभ सहज की कविताओं ने तालियों से समा बांध दिया। कवियत्री सरिता ने अपनी कविता ‘मैं सरिता’ से तालियां बटोरी। कवि त्रिलोकेश्वर ने इंसानियत के जरिए वक्त की अहमियत बताते हुए वाहवाही पाई। कार्यक्रम में सुधांशु रंजन, नवीन आदि लोग मौजूद रहे।
अमर उजाला का जताया आभार
कवियों ने अपने मनमोहक शब्दों से अमर उजाला का आभार जताया। अमर उजाला को समर्पित कवियत्री शुभम त्यागी की कविता ‘दिलों से नफरते मिटाना चाहते हैं ’ ने भी लोगों के दिलों को छुआ।