आईटीएमएस परियोजना के तहत 2022 में शहर की 76 प्रमुख जगहों पर लगवाए गए थे इमरजेंसी कॉल बॉक्स, लेकिन देखरेख नहीं हुई
कुछ का हो रहा संचालन, शरारती तत्व कंट्रोल रूम को करते हैं परेशान
कई बॉक्स ऐसी जगहों पर लगाए गए, जहां पहुंचना मुश्किल
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर की प्रमुख सड़कों और तिराहों-चौराहों पर आम जन को विषम परिस्थितियों, खासकर महिला सुरक्षा के लिए लगाए गए इमरजेंसी कॉल बॉक्स (एसओएस बॉक्स) लावारिस हो गए हैं। साल 2022 के नवंबर में शुरु हुई इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) परियोजना के तहत 76 जगहों पर ये बॉक्स लगए गए थे, जिनमें चिल्ला गेट, रजनीगंधा चौराहा, अट्टा पीर, सेक्टर-18 ट्रैफिक सिग्नल, सेक्टर-15 मेट्रो स्टेशन गोल चक्कर, बॉटनिकल गार्डन, शशि चौक, स्टेडियम चौराहा आदि शामिल हैं।
हालांकि, जागरूकता और जानकारी के अभाव में शहरवासियों ने इनकी मदद नहीं ली। समय के साथ देखरेख के लिए जिम्मेदार एजेंसी भी इन्हें भूल गई। ऐसे में यह कहीं टूट गए तो कहीं बंद हो गए। इनकी स्थापना कई ऐसी जगहों पर भी कर दी गईं, जहां आसानी से पहुंचा ही नहीं जा सकता है।
प्राधिकरण ने 68.40 करोड़ रुपये परियोजना पर खर्च किया था। बॉक्स के हेल्प बटन दबाते ही जरूरतमंद सीधे पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए कंट्रोल रूम के संपर्क व नजर में आ जाता है। फिर आपातकालीन सेवाओं जैसे पुलिस, डॉयल-112, अस्पताल, अग्निश्मन विभाग आदि से समन्यवय स्थापित कर कंट्रोल रूम मदद मुहैया कराता है।
अच्छा चखना कहां मिलेगा...
कई एसओएस बॉक्स ऐसी जगहों पर लगे हैं जिन तक सामान्य तरीके से पहुंचना भी मुश्किल है। सेक्टर-75 व 76 के सामने विश्वकर्मा रोड पर तीन बॉक्स लगवाए गए हैं। ये बॉक्स कई फिट ऊंचे डिवाइडर पर लगे हैं। चलते ट्रैफिक को पार कर डिवाइडर तक पहुंचना, फिर कई फिट ऊंचे डिवाइडर पर चढ़ पाना किसी के लिए आसान नहीं है।
कई जगहों पर लगे एसओएस बॉक्स जो चल रहे हैं, उनका प्रयोग शरारत के लिए किया जा रहा है। हेल्प का बटन आधी रात को दबाकर अच्छा चखना कहां मिलेगा यह पूछा जा रहा है। वहीं, कोई बॉक्स लगाने का कारण पूछता है। औसतन 20-22 लोग 15 दिन में कहीं न कहीं पर बटन दबाते हैं।
कोट
एसओएस बॉक्स शहर के निवासियों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगवाए गए हैं। अगर कहीं पर बंद हैं या टूट-फूट है तो इनको जल्द ही सही करवाया जाएगा।-एसपी सिंह, नोएडा प्राधिकरण।