- किसी ने जिम्मेदारियों के चलते छोड़ी पढ़ाई, तो किसी को आर्थिक तंगी ने रोका, 2 लाख से अधिक महिलाएं
- एनआईओएस के जरिए 4.8 लाख से ज्यादा लोगों ने पूरी की पढ़ाई, महिलाओं की भागीदारी में खास बढ़ोतरी
नेहा शर्मा
नोएडा। सीखने की कोई उम्र नहीं होती यह कहावत अब समाज में हकीकत बनती नजर आ रही है। 30 वर्ष की उम्र पार करने के बाद भी बड़ी संख्या में लोग दोबारा पढ़ाई की ओर लौट रहे हैं। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) के आंकड़ों के अनुसार पिछले सात वर्षों में 4.81 लाख से अधिक लोगों ने 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में हिस्सा लिया। इनमें 2 लाख से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं, जो अपने अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए फिर से शिक्षा से जुड़ रही हैं।
आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2019 में 30 वर्ष से अधिक उम्र के 55,114 पुरुष और 39,981 महिलाओं ने नामांकन कराया। 2020 में थोड़ी गिरावट के बाद 2021 में फिर तेजी आई, जब 53,634 पुरुष और 34,483 महिलाएं पढ़ाई से जुड़ीं। इसके बाद 2022 और 2023 में भी हर साल करीब 29 हजार से अधिक महिलाओं ने दोबारा शिक्षा का रास्ता चुना, जो समाज में बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है।
स्किल आधारित कोर्स की ओर भी बढ़ा रुझान-
विशेषज्ञों का मानना है कि अब पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ स्किल आधारित कोर्स की ओर भी लोगों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। 2024 और 2025 में नामांकन के आंकड़ों में हल्की कमी जरूर दिखी, लेकिन व्यावसायिक और कौशल आधारित पाठ्यक्रमों में वयस्क शिक्षार्थियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
प्रमोशन और बेहतर करियर की चाह बना रही प्रेरणा-
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, 30 वर्ष के बाद पढ़ाई करने वाले अधिकांश लोग नौकरी में प्रमोशन, बेहतर करियर और आत्मविश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से दोबारा शिक्षा से जुड़ते हैं। वहीं कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियों या आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी और अब अपने सपनों को पूरा करने के लिए नया कदम उठा रहे हैं।
एनआईओएस सभी वर्गों के लोगों को शिक्षा का अवसर देता है। यहां किसी भी प्रकार की ऊपरी आयु सीमा नहीं है, जिससे गृहिणी, श्रमिक या वरिष्ठ नागरिक भी अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी कर सकते हैं। - प्रो. अखिलेश मिश्र, अध्यक्ष, एनआईओएस
आंकड़ों पर एक नजर (2019–2025)
पुरुष - 2,80,970
महिला- 2,00,779