संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। कपालमोचन मेले में चौथे दिन श्रद्धालुओं की संख्या इस बार काफी कम रही। कार्तिक पूर्णिमा के स्नान करने से पूर्व सड़कों पर श्रद्धालुओं के वाहनों की जो लाइन लगती थी वह इस बार देखने को नहीं मिली। वहीं स्नान करने के साथ श्रद्धालु घर लौटने लगे। कुछ साल पहले तक पंजाब से आए श्रद्धालु मेला में पांच दिन तक ठहरते थे। परंतु अब ऐसा नहीं रहा। इस बार मेला शुरू होने से सप्ताहभर पहले ही श्रद्धालुओं का मेले में आना शुरू हो गया था।
इस बार श्रद्धालु कार्तिक पूर्णिमा से पहले ही सरोवरों में स्नान कर वापस जाते रहे। लौट रहे श्रद्धालु हरजोत सिंह, सुरजीत कौर, हरविंद्र सिंह का कहना है उन्होंने दो दिन मेला देखा। लेकिन गेहूं बिजाई का सीजन चल रहा है। घर जाकर खेतों में गेहूं की बिजाई करनी है। वहीं कमलेश रानी, गीती रानी ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा पर इस बार शादियों के लिए शुभ मुहूर्त भी है।
परिवार में तो कहीं रिश्तेदारों से निमंत्रण पत्र आए हुए हैं। इसलिए शादियों में जाना जरूरी है और तैयारियां भी करनी है। इसलिए पहले ही स्नान कर वापस लौट रहे हैं। लौटने से पहले श्रद्धालु मंदिरों में दिल खोल कर दान भी कर रहे हैं। श्राइन बोर्ड द्वारा मंदिरों में रखे दानपात्रों में कनाडा के डॉलर निकल रहे हैं।
कपालमोचन मेले में अपने साथियों का इंतजार करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन मेले में अपने साथियों का इंतजार करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन मेले में अपने साथियों का इंतजार करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन मेले में अपने साथियों का इंतजार करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन मेले में अपने साथियों का इंतजार करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन मेले में अपने साथियों का इंतजार करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन मेले में अपने साथियों का इंतजार करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन मेले में अपने साथियों का इंतजार करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन मेले में अपने साथियों का इंतजार करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन मेले में अपने साथियों का इंतजार करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन मेले में अपने साथियों का इंतजार करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन मेले में अपने साथियों का इंतजार करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन मेले में अपने साथियों का इंतजार करते श्रद्धालु। संवाद