सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि 31 मार्च से पहले खरीदे जा चुके बीएस-4 मानक वाले ऐसे वाहनों के पंजीकरण की सशर्त इजाजत दे दी है, जिन्हें दिल्ली में नगर निगम ने आवश्यक जन उपयोगी सेवाओं में इस्तेमाल करने के लिए खरीदा था। साथ ही सीएनजी वाहनों और एक अप्रैल के बाद बिके बीएस-6 मानक वाले वाहनों के पंजीकरण को भी शीर्ष अदालत ने हरी झंडी दिखा दी है।
चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के सामने शुक्रवार को पेश याचिका में तीन तरह (सीएनजी, बीएस-4 और बीएस-6) के वाहनों के पंजीकरण का मुद्दा रखा गया था। इन सभी वाहनों का पंजीकरण आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं के लिए किया जाएगा। पीठ ने अपने फैसले में कहा, सीएनजी वाहनों में उत्सर्जन तय मानक से कम ही होने के चलते इन वाहनों के पंजीकरण से इनकार करने का का वैध कारण नहीं है।
लिहाजा ऐसे वाहनों का पंजीकरण होना चाहिए। जस्टिस बोबडे के अलावा जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस रामसुब्रमयम की मौजूदगी वाली पीठ ने गौर किया कि बीएस-6 मानक एक अप्रैल के बाद लागू हुए। ऐसे में इस तारीख के बाद मौजूद सभी वाहन पर्यावरण नियमों पर खरे उतरते हैं। इस कारण उन्होंने आवश्यक जन उपयोगी सेवाओं में इस्तेमाल होने वाले बीएस-6 मानक वाले वाहनों के भी पंजीकरण की अनुमति दे दी।
वहीं, 31 मार्च से पहले खरीदे गए बीएस-4 वाहनों के पंजीकरण की मांग को भी सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त मंजूरी दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 31 जून, 2020 से पहले वाहन पोर्टल में दर्ज हो चुके वाहनों का भी पंजीकरण किया जाना चाहिए। बशर्ते उन वाहनों का इस्तेमाल नगर निगम के लिए आवश्यक जनसेवाओं में करने के लिए जरूरी हो। हालांकि कोर्ट ने कहा कि हर वाहन के लिए पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (इपका) से भी हरी झंडी लेनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इपका से तमाम लंबित मामलों पर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है।
इससे पहले अक्तूबर, 2018 में शीर्ष अदालत ने बीएस-4 मानक वाले वाहनों की बिक्री पर भारत में एक अप्रैल, 2020 से प्रतिबंध लगा दिया था। केंद्र सरकार ने 2016 में बीएस-5 मानक के बजाय बीएस-4 के बाद सीधे बीएस-6 मानक वाले ईंधन का उपयोग 2020 से चालू करने की घोषणा की थी।