शिकायत साबित नहीं होने पर आयोग ने खारिज किया दावा
75 हजार रुपये के मुआवजे की मांग करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग में दायर किया था वाद
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। जिला उपभोक्ता आयोग में अपनी शिकायत को साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य देने होंगे। अगर साक्ष्य देने में शिकायतकर्ता नाकाम रहता है तो दावा खारिज हो जाएगा। ऐसे ही एक मामले में ऑनलाइन आर्डर देने के बाद सामान नहीं पहुंचने पर पैसा वापस की मांग किए बगैर ही मानसिक उत्पीड़न के 75 हजार रुपये दिलाने के दावे को जिला उपभोक्ता आयोग ने खारिज कर दिया।
आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा ने सुनवाई की। नोएडा के सेक्टर-137 निवासी अशोक कुमार ने 3 अक्तूबर 2023 को जियोमार्ट पर 14 सामानों का ऑनलाइन ग्रोसरी आर्डर दिया था, जिसकी कीमत करीब 2316 रुपये थी। उसने डेबिट कार्ड के जरिए छूट के बाद 2126 रुपये का भुगतान किया था। भुगतान करने के बाद उनको न तो आर्डर डिलीवर हुआ और न ही पैसे वापस मिले। आर्डर पर 7 अक्तूबर को डिस्पैच दिया गया था लेकिन वह वापस आ गया। एप पर एक मैसेज दिया कि रिफंड की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सात दिनों में पैसे वापस आ जाएंगे। शिकायत के बाद भी उनको पैसे वापस नहीं मिले। कस्टमर केयर पर शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं किया गया। उन्होंने कंपनी के सीईओ संदीप बरगंती को नोटिस भेजा, जिस पर आर्थिक नुकसान, परेशान और मानसिक उत्पीड़न के लिए 75 हजार रुपये के मुआवजे की मांग करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया गया।
आयोग में सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। आयोग में एक पक्षीय सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों का अवलोकन किया गया। आरोप है कि आर्डर के लिए भुगतान की गई राशि वापस नहीं की गई लेकिन शिकायतकर्ता ने विशेष रूप से प्रेयर क्लॉज में मांग वाले हिस्से में आर्डर की राशि की वापसी का दावा नहीं किया है। केवल मुआवजे की मांग की है। वित्तीय नुकसान, असुविधा और मानसिक उत्पीड़न के लिए 75 हजार रुपये के मुआवजे का दावा, मांगी गई राशि के अनुपात में ठोस सबूतों द्वारा समर्थित नहीं है। सेवा में कमी या अनुचित व्यापार व्यवहार के आरोपों के ठोस सबूत के अभाव में ऐसा दावा नहीं माना जा सकता है। ब्यूरो